Friday, 28 March 2025

राजगुरु - डॉ० उषा पाण्डेय



 राजगुरु - डॉ० उषा पाण्डेय

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भारत माँ के वीर शहीदो, करते नमन हम हाथ जोड़कर। 
मिटा दिया खुद को आपने, अपने प्यारे वतन पर।
महान क्रांतिकारियों में, राजगुरु का नाम है एक।
उम्र थी छोटी, पर खूबियाँ थीं अनेक।
हरिनारायण जी और पार्वती जी के लाडले,  चौबीस अगस्त उन्नीस सौ आठ को धरा पर आये।
'शिव राम हरि राजगुरु' नाम पाये।
निज सुख की परवाह नहीं की, देश पर खुद को वार दिये।
निज स्वार्थ को परे रखें, देश को सर्वोच्च स्थान दिये।
लाला लाजपत राय जी की, खून का बदला लिये।
साथियों के साथ मिलकर, क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिये।
जान चली गई, पर पीछे नहीं हटे। 
देश आजाद कराना है, लिए प्रण और रहे डटे।
देश हित के लिए, किये खुद को न्योछावर।
देश भक्ति का जज्बा मन में, 
देशभक्त राजगुरु हो गये अमर।
उनकी देशभक्ति देख, अंग्रेजी सरकार थर्राई थी।
झूल गए फांसी के फंदे पर, चेहरे पर शिकन न आई थी।
तेईस मार्च उन्नीस सौ इकतीस को, उन्हें फांसी दी गई। 
भारत की जनता, दु:ख में डूब गई।
वतन के लिए जो मर मिटे, उनके लिए शब्द लाऊंँ कहाँ से।
भारत माता की रक्षा हेतु, जो हंँसते-हँसते चले गए जहाँ से।
देश सदा याद रखेगा, राजगुरु जी की कुर्बानी। 
देदिप्यमान रहेंगे सदा,
राजगुरु जी बलिदानी।
आप लोगों की शहादत से, देश हुआ आजाद। 
जब तक यह दुनिया रहेगी, 
हम सबको याद आयेंगे आप।
ऐसे वीर शहीद को हम,  कोटि-कोटि नमन करते हैं।
भारत माँ के इस वीर सपूत को,
श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।

डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
स्वरचित

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