Thursday, 12 February 2026

पूजा - अनीता चमोली

अनीता चमोली
उत्तराखंड देहरादून
 
पूजा.....
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पूजते हैं सब  ईश्वर
श्रद्धा भाव भरा हृदय मे
मन मे लगन अनुराग
पूजा भाव सब एक सा
पद्धति हैं भिन्न भिन्न
कोई पढता नमाज अल्लाह की
कोई करता इष्टदेव की आरती
कोई गिरजे मे करता प्रेयर
 एक ही शक्ति नाम भिन्न
प्रार्थना मे मांगते खुशहाली
पूजते चांद सूरज हवा जल मिट्टी
जीवनदायिनी प्रकृति
पूर्ण मनोकामना लाती खुशियाँ
पूजा जगाता समर्पण मनोभाव
आशीर्वाद विश्वास से भरता जीवन
 

अपनी पहचान


अपनी पहचान

य द आप सूरज की तरह चमकना चाहते हो तो पहले सूरज की तरह जलना होगा

य द आप फूलों की तरह खलना चाहते हो तो

पहले आपको फूल की तरह मुस्कुराना सीखना होगा

य द आप कोयल की तरह गाना चाहते हो तो पहले आपको बना आलस के सवेरे उठना होगा

य द आप इंद्रधनुष की तरह चमकना चाहते हो तो पहले आपको उसके सामान रंगीन बनना होगा ।

य द आप पानी की तरह साफ रहना चाहते हो तो पहले आपके मन को साफ रखना होगा

य द आप अच्छा इंसान बनना चाहते हो तो मानवेतर खू बयों को अपनाना होगा ।

य द आप सबके दल में छाना चाहते हो तो

अपने दलों में दूसरों के प्र त प्यार आदर लाना होगा य द आप इस दु नया में आगे बढ़ना चाहते हो तो अपने तन मन से प रश्रम करना होगा ।

चुनाव प्रक्रिया ढोंग एवं अन्याय विकृतियों से मुक्त हो - प्रदीप कुमार नायक

चुनाव प्रक्रिया ढोंग एवं अन्याय विकृतियों से मुक्त हो - प्रदीप कुमार नायक
       स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार
                     मोदी सरकार 3.0 ने 18 सितम्बर 2024 को एक देश एक चुनाव प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए मंजूरी दे दी थी l पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की रिपोर्ट को कैबिनेट ने स्वीकार कर लिया था l एक देश एक चुनाव को लेकर लम्बे समय से चली आ रही कवायद को लेकर मोदी सरकार आगे बढ़ती नहीं दिख रही हैं l
               भारतीय लोकतान्त्रिक राजनीति की व्यवहारिक प्रणाली चुनावी मतदान है, जिसमे मतदाता अपनी इच्छा से अपनी नुमाइन्दगी की हक किसी सरकार  के जिम्मे सौपता है!चुनाव में सभी दलों के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने कों मिलता है!
           लगभग सभी प्रजातंत्रिक देशोे में चुनाव की प्रथा और व्यवस्था है!चाहे यू एस ए हो या अन्य ब्रिटिश हुकूमत वाले देश हो!हाँ चुनावी प्रक्रिया में थोड़ी असमनातायें जरूर देखने कों मिलती है, पर चुनाव शब्द से ही बोधित है!चयन करना और प्रजातंत्रिक ढंग से चुनाव हो वह भी उस व्यक्ति द्वारा जिनके हितो के रक्षार्थ व्यक्ति कुर्सी पर बैठकर उनके हितो में काम करें!संक्षेप में तो यही समझा जाता है कि जनता अपने शासक या राजा का ही चुनाव प्रत्यक्ष -अप्रत्यक्ष ढंग से करना होता है!चाहे प्रत्यक्ष रूप में राष्ट्रपति का चुनाव हो, प्रधानमंत्री का हो या सदस्यों के रूप में विधानसभा तथा लोकसभा सदस्यों के सदन की संख्या के अनुपात में शासकों का चुनाव करते थे!
             यह आश्चर्य जनक भी है कि पूरी दुनियां में सिर्फ भारत ही एक ऐसा देश है, जहाँ लगभग पुरे वर्ष कहीं न कहीं चुनाव होते ही रहते है!कभी राष्ट्रपति, कभी लोकसभा, कभी विधानसभा, कभी विधान पार्षद, कभी राज्य सभा, कभी नगर निगमों, कभी नगर पालिकाओं, कभी पंचायतों, जिला पार्षदों का!ये जितने भी चुनाव है,वो सभी प्राय:अलग -अलग ही होते रहें है!
                     आजादी के बाद लगभग दो -तीन दशकों तक तो विधानसभाओं और लोकसभाओं के चुनाव एक साथ होते रहें थे!पर बाद के दिनों में राजनितिक पार्टियों और राजनेताओं ने अपने निजी स्वार्थ के लिए एक चुनाव कराने में अपनी हानि और हार कों देखते हुए अलग -अलग चुनाव कराना शुरू किया!जैसा किसी देश में नहीं हो रहा है!अब इस बात पर भी गौर कीजिये कि ज़ब भी चुनाव होते है, सबसे पहले तो सभी राजनेता या राजनितिक पार्टियां सत्ता कि कुर्सी हथियाना चाहती है!ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय या जनहित कि भावना तथा उद्देश्यों कों ताक पर रखकर उच -नीच, जात -पात, धर्म -संप्रदाय और वैमनस्यता की बातें जोर -शोर से उठाते है तथा एक दूसरे पर गंदे कीचड़ उछालते है, जिससे देश की अखंडता बिगड़ती है!लोग आपस में द्वेष और जलन पैदा करते है!चुनाव में हारने के बाद भी निर्लल्लजता से चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संस्थाओं तक कों बदनाम किया जाता है!आधुनिक युग में ई वी एम के बहाने पूरी जनतान्त्रिक व्यवस्था कों चोट पंहुचाई जाति है!यही नहीं चुनाव अगर बिहार में होता है तब भी उत्तर प्रदेश में जाकर एक पार्टी दूसरी पार्टी कों कोसते व गालियाते है!एक दूसरे कों नीचा दिखाने के लिए तथा भ्रम फैलाने के लिए यह लोग ऐसा करते है!वैसे, ऐसा लगभग पुरे देश में कहीं न कहीं कुछ न कुछ होते ही रहता है तो फिर चुनाव आचार संहिता के चलते विकास के कार्यों में भी बाधाएं पहुँचती रहती है!
                         इसके अलावा प्रशासनिक वास्तविक तथा व्यवहारिक रूपसे जिस राज में भी चुनाव होते है, वहाँ के वरिष्ठ पदाधिकारीगण जिनकी संख्या सैकड़ो में होती है और सारे लोग प्रगति के कामकाज कों छोड़कर चुनाव में ही संलग्न रहते है!खर्च की बात तो पूछिए मत, चुनाव आयोग एक ऐसी संस्था है जहाँ सेक्रेसी मेंटन करनी होती है!अत:वहाँ किस मद से कहाँ कितना कब खर्च हुआ या होता है इसको आडिट करने की परम्परा नहीं है फंड मुहैया कराना सरकार का काम है, खर्च आयोग स्वयं करता है!इस खर्च की कोई सीमा भी नहीं है!सुरक्षा बलों में सैनिकौ से लेकर अर्द्ध सैनिक बलों और पुलिस पदाधिकारियों तथा ग्राम रक्षा दल से लेकर चौकी दारों तक कों चुनाव कार्य में लगाएं जाते है, जिससे लोक समाज की सुरक्षा पर भी असर पड़ता है!कभी -कभी तो चुनाव के वक़्त शातिर अपराधी तक अपने बड़े अपराधिक घटनाओं कों अंजाम देते हैं l
                      यह आवाज़ आनी चाहिए हर गांव और शहरों से कि अब ऐसे चुनाव से हम तंग आ गये है!वर्ष 1974 के जे पी आंदोलन के बाद 1977 में हुए चुनाव से आजतक हुए सभी चुनावों कों पढ़ने समझने के बाद यही समझ में आया कि चुनाव एक प्रतान्त्रिक षड्यंत्र है!वक़्त आ गया है कि ज़ब हमें जहाँ है वही से यह आवाज़ बुलंद करनी चाहिए कि चुनाव प्रक्रिया ढोंग एवं अन्याय विकृतियों से मुक्त हो l
               प्रत्यक्ष तौर पर तो सारे चुनावों के लिए वोटर लिस्ट ही आने कों है!कम से कम प्रत्यक्ष चुनाव वाले आम नागरिकों के लिए तो एक वोटर लिस्ट और एक ही पहचान पत्र परम् आवश्यक है, तथा एक ही दिन चुनाव भी हो ऐसा करने से भारत के सम्पूर्ण व्यवस्था प्रभावित होंगी और विकास दर आसमान छूने लगेगी!इससे समय कम लगेगा, खर्च कम होंगी और शक्ति तथा ऊर्जा भी कम लगकर बचत होंगी!एक वोटर लिस्ट एक दिन चुनाव बहुत ही कारगर और व्यवहारिक है!
           भारत कों चुनावों का देश कहाँ जाय तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होंगी!किन्तु, विचित्र परन्तु सत्य है कि भारतीय लोकतान्त्रिक परिदृश्य इतना आरामदेह नहीं है!यहाँ चुनाव विराम अथवा कहें चुनावी विश्रामवकाश कभी नहीं होता!लोकसभा चुनाव के बाद दूसरे बड़े चुनाव विधानसभा होते है, फिर स्थानीय निकयो के चुनावी दौर हर एक चुनाव चाहे वह छोटा हो अथवा बड़ा!विजयी और विजित दोनों पक्षो के लिए खास मायनेदार होता है!आगे की राह चाहे जों भी हो, लोगों कों विश्वास करने में थोड़ा समय ही क्यों न लगे, एक देश एक साथ सभी चुनाव एक आम व्यक्ति के लिए यह सकून भरी बात हैं l

Friday, 30 January 2026

अटखेलियां करती पतंग - अनीता चमोली

 
अटखेलियां करती पतंग - अनीता चमोली उत्तराखंड (देहरादून)

सजा है आसमान नीली पीली
हरी गुलाबी पतंगांे से
और महक रहा है आज 
घर गुड़ तिल के
लड्डूओं की खुशबू से
मकर संक्रांति के इस 
त्योहार पर जैसे
न्यौता दिया हो सूरज को 
मुंह मीठा करने का 
एक साथ सभी ने
उत्सव मना रहा आसमान 
सुनहरी धूप की 
रूपहली छटा  में 
रंग रहा सभी को 
अपने रंग में और 
पंछियों की कलरव के साथ 
बहक रहा है जैसे
कि खिलते फूल बहकते लहकते 
मंद-मंद मस्त हवा में
लहराती बलखाती पतंगें जैसे 
ललचा रही हो किरणों को 
कहती हुई यही कि-
’आओ हमारे संग-संग 
तुम भी अटखेलियां करो!

गणतंत्र दिवस - संविधान - पदमा तिवारी दमोह

 

गणतंत्र दिवस - संविधान - पदमा तिवारी दमोह

आर्यावर्त है देश हमारा,
गणतंत्र दिवस मनाते हैं। 
करके नमन संविधान को, 
तिरंगा हम फहराते हैं।।

अनेकता में एकता, 
यही हमारी है पहचान। 
मिलजुल कर रहते सभी
भारत माता की है संतान।
देश हमें प्राणों से प्यारा,
इस पर जान गंवाते  हैं।।
करके नमन संविधान को, 
तिरंगा हम फहराते हैं।।

प्रेम के धागे में बांधे,
अपने देशवासियों को।
बढ़ करके हम हाथ मिलाते,
बच्चे बूढ़े और जवानों को।।
नहीं किसी से डरते हैं, 
आगे कदम बढ़ाते हैं।।
करके नमन संविधान को, 
तिरंगा हम फहराते हैं।।

अथक प्रयासों से हमने,
आजादी पाई थी। 
अनगिनत वीर शहीदों ने, 
अपनी जान गंवाई थी।।
वीर शहीदों की गाथाएं, 
हम इतिहासों में गाते हैं।।
करके नमन संविधान को 
तिरंगा हम फहराते हैं।।

न झुका है ना झुकने देंगे,
सिर गिरिराज हिमालयका।
प्यारा है ये वतन हमारा,
मिटाएंगे बीज नफरतों का।।
अमर रहे गणतंत्र हमारा, 
संदेश यही फैलाते हैं,
करके नमन संविधान को। 
तिरंगा हम फहराते हैं।।

@पदमा तिवारी दमोह मध्य प्रदेश