Saturday, 10 October 2026

सत्य-अहिंसा के महात्मा डॉ. वै. कस्तूरी बाई

सत्य-अहिंसा के महात्मा डॉ. वै. कस्तूरी बाई 

महात्मा गांधी भारत की शान,
 उनसे ऊँचा भारत का मान।
 सत्य बना उनका जीवन-प्राण,
 अहिंसा बनी उनकी पहचान।
स्वतंत्रता का देखा था स्वप्न,
 त्याग से किया उसे उन्होंने पूर्ण।
 सत्याग्रह की लेकर मशाल,
 जगा दिया जन-जन में उजियाल।
सत्य की शक्ति जग को बताई,
 अहिंसा की राह हमें दिखाई।
 अन्याय के आगे शीश न झुकाया,
 शांति का संदेश जग में फैलाया।
स्वदेशी का मंत्र जन-जन गाया,
 चरखा घर-घर में पहुँचाया।
 चरखा केवल सूत न काता,
 स्वाभिमान का दीप जलाता।
सेवा को जीवन का धर्म बनाया,
 त्याग से भारत को बल पहुँचाया।
 सत्याग्रह से संघर्ष किया,
 अहिंसा से जन-मन जीत लिया।
महात्मा का जीवन तप की मिसाल,
 भारत के माथे का उज्ज्वल भाल।
 गांधी का सत्य अमर कहलाया,
 गांधी ने जग को सत्य सिखाया।
राष्ट्रपिता का पावन नाम,
 भारत का गौरव, भारत की शान।
 सत्य रहे तो जीवन धन्य,
 अहिंसा से हो जग कल्याण।
शांति खिले हर मानव-द्वार,
 सेवा बने प्रेम का आधार।
 स्वदेशी से बढ़े देश का मान,
 स्वतंत्र रहे अपना हिंदुस्तान।
हे महात्मा! तेरी अमर कहानी,
 आज भी लगती सबसे सुहानी।
 त्याग, सत्य, सेवा की ज्योति,
 रहे सदा भारत की ज्योति।

डॉ. वै. कस्तूरी बाई 
बेंगलूरु 
कर्नाटक

सत्य की मशाल - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "

सत्य की मशाल - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "

न तलवार उठाई, न कोई हथियार,
फिर भी हिला दिया था साम्राज्य का संसार।
हाथों में सत्य था, हृदय में अहिंसा,
भारत की मिट्टी ने रचा नया इतिहास।
धोती थी सादी, मगर विचार महान,
आँखों में सपने, होंठों पर हिंदुस्तान।
चल पड़े अकेले तो कारवाँ बन गया,
एक साधारण मानव—जन-जन की आवाज़ बन गया।
“सत्य ही शक्ति है”—जीवन ने समझाया,
अहिंसा के पथ पर जन-जन को चलाया।
अन्याय के आगे झुके नहीं कभी,
सत्याग्रह से जगा दी सोई हुई सभी।
चरखे की धुन में स्वाभिमान जगाया,
स्वदेशी का दीप हर घर में जलाया।
कहा—अपने श्रम पर विश्वास करो,
अपने हाथों से भारत का विकास करो।
नफरत की आँधी में प्रेम का दीप जलाया,
टूटे हुए दिलों को मानवता से मिलाया।
धर्म अलग हों, फिर भी इंसान एक है,
यही तो भारत की आत्मा का नेक संदेश है।
त्याग था जीवन, सेवा थी साधना,
राष्ट्रप्रेम ही उनकी सच्ची आराधना।
मिट्टी से उठकर मिट्टी में मिल गए,
पर विचार उनके अमर दीप बन गए।
आज भी जब दुनिया में हिंसा छा जाती है,
जब मानवता कहीं घायल हो जाती है,
तब याद आती है वह शांत-सी पुकार—
“सत्य और अहिंसा ही हैं जीवन का आधार।”
हे बापू! तुम्हारी राह कठिन सही,
पर मानवता के लिए इससे सुंदर राह नहीं।
जब तक सत्य की लौ दिलों में जलती रहेगी,
तब तक तुम्हारी गाथा दुनिया में चलती रहेगी।
नमन उस संत को, नमन उस विचार को,
नमन भारत के उस महान संस्कार को।
जिसने सिखाया—जीतना हो संसार,
तो पहले जीत लो अपने भीतर का अंधकार।
सत्य रहे, अहिंसा रहे, मानवता का मान रहे,
भारत की पावन धरती पर सदा शांति का गान रहे।

डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "
Punjab 

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी - डॉ. अशोक कुमार जाटव

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी - डॉ. अशोक कुमार जाटव

जब था देश पराधीन,
चारों ओर था हाहाकार,
फैल रही थी असहनीय चीत्कार,
जहाँ देखो, वहीं अत्याचार ही अत्याचार।
जुल्म ढा रहे थे फिरंगी,
क्योंकि देश था उनके अधीन,
जब राष्ट्र ने लगाई पुकार,
गांधी जी का हुआ अवतार।
किया संघर्ष, राह पकड़ी,
देश ने पकड़ी उत्कर्ष की डगर,
त्याग, तपस्या और बलिदान,
गांधी जी का रहा देश को अवदान।
राह थी सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह,
सभी संचालित रहते थे शांति से,
अंग्रेज हार मानते जाते,
गांधी जी के मार्ग से।
होली जलाई विदेशी सामानों की,
नारा था—स्वदेशी अपनाओ,
देश को स्वतंत्र कराओ,
चरखा था आधार-स्तंभ।
स्वदेशी का महत्वपूर्ण प्रकल्प,
सेवा था गांधी जी का मूलमंत्र,
नारा था—तभी आएगा प्रजातंत्र,
गांधी जी के हर कार्य ही उनकी पहचान।
राष्ट्रपिता गांधी जी हैं भारत की जान,
आज उनके कार्यों से भारत महान।

डॉ. अशोक कुमार जाटव
व्याख्याता, भोपाल, मध्यप्रदेश

स्वदेशी - डॉ मेजर मंजू चावला

स्वदेशी - डॉ मेजर मंजू चावला 

सारी धरती अच्छी है, हर एक देश प्यारा है,
गर्व हमें है सारे जहां से अच्छा देश हमारा है, 
हमको कोशिश करनी है ये और भी उन्नत हो ,
प्रगति करता ही जाए हर जगह सम्मानित हो ,
दिन रात तरक्की देश करे ये प्रयास हमारा है, 
गर्व हमें है सारे जहां से अच्छा देश हमारा है, 
बुजुर्गों का तुजुर्बा युवा शक्ति और जोश, मिलजुल कर गर काम करें उड़ा दें सबके होश ,
हर असंभव को संभव कर सकता देश हमारा है ,
गर्व हमें है सारे जहां से अच्छा देश हमारा है ,
मैं भारत हूं तुम भारत हो भारत सिर्फ जमीन नहीं ,
इसके साथ कुछ गलत करना क्या खुद की तौहीन नहीं ,
ईमानदारी से ख्याल रखना अपना दिल देश हमारा है ,
गर्व हमें है सारे जहां से अच्छा देश हमारा है ,
जितना भी मुमकिन हो आत्मनिर्भर बनाना है ,
क्यों बाहर की चीजों पर देश का पैसा बहाना है, 
स्वदेशी अपनाओ स्वदेशी अपनाओ यही देश का नारा है ,
गर्व हमें है सारे जहां से अच्छा देश हमारा है ,
लगे कभी कि दूसरे की चीज अपनी से बेहतर है, 
अपनी सुधारो इस्तेमाल करो देश में इतनी काबिलियत है ,
स्वदेशी सुधारो स्वदेशी अपनाओ मांगे देश हमारा है ,
गर्व हमें है सारे जहां से अच्छा देश हमारा है।

डॉ मेजर मंजू चावला 
चंडीगढ़ 

बेजान लोकशाही - डॉ केजे गढ़वी

बेजान लोकशाही - डॉ केजे गढ़वी

व्यर्थ गया बापू आपका बलिदान।।

हार गया संत और जीत गए शैतान।।

काले के कर्म गोरों से भी हो गए काले।

गली गली में गोडसे, गांव गांव हैवान।।

अंग्रेजी औलाद से कैसे होंगे आजाद।

गद्दारों की चुंगल में फंसा हिंदुस्तान।।

 आंगन में आग, बस्ती जैसे जलियांवाला बाग।

आंखों ने अंगारा,वतन बना रेगिस्तान ।।

अहिंसा बेमिसाल,लकड़ी को तोप झुकी थी।

भागे गोरे  उठाई झोली,यह फकीरी पहचान।।

हर होठों पर झूठ,चारों ओर मची है लुमलुंट।

हर आंखों ने खौफ,जहरीली हर जुबान।।

मां भारती कराहे, उसे कौन दिखाए राहें,।

लोकशाही भरे आहे निकल जाएगी जान। ।


,,,,,,,,,,, डॉ केजे गढ़वी 

द्वारका, गुजरात