Sunday, 23 August 2026

स्वाधीनता का स्वाभिमान / डॉ. प्रो. वै. कस्तूरी बाई

 स्वाधीनता का स्वाभिमान / डॉ. प्रो. वै. कस्तूरी बाई 

पंद्रह अगस्त की पावन बेला,
 लेकर आई स्वतंत्र प्रभात,
 वीरों के त्याग, तपस्या से,
 मिली हमें आज़ादी की सौगात।
नमन उन अमर बलिदानों को,
 जिन्होंने जीवन वार दिया,
 भारत-माता की मुक्ति हेतु,
 हँसकर अपना संसार दिया।
यह स्वतंत्रता केवल उत्सव नहीं,
 यह त्यागों का अमर निशान,
 यह स्वाभिमान की उज्ज्वल ज्योति,
 यह भारत की महान पहचान।
कितने वीरों ने कष्ट सहे,
 कितनों ने कारावास सहा,
 कितनों ने मातृभूमि के हित,
 अपना सर्वस्व अर्पित किया।
जय जवान! जय किसान!
 इनसे भारत की शान महान।
 सीमा पर प्रहरी राष्ट्ररक्षक,
 खेतों में अन्न उगाता किसान।
 दोनों के श्रम और त्याग से,
 गौरवमय है हिंदुस्तान।
स्वराज हमारा पावन संकल्प,
 स्वाधीनता हमारा अभिमान,
 एकता, अखंडता, सत्य, अहिंसा—
 भारत की यही महान पहचान।
न भाषा बाँटे, न जाति बाँटे,
 न कोई धर्म बने व्यवधान,
 सब मिलकर भारत को सँवारें,
 सबके हृदय में हो हिंदुस्तान।
युवा बढ़ें नव उत्साह लिए,
 ज्ञान बने उनका अस्त्र महान,
 श्रम की पूजा, सत्य का पथ हो,
 राष्ट्रसेवा बने जीवन-गान।
तिरंगे की आन न झुकने देंगे,
 भारत का मान बढ़ाएँगे,
 वीरों के पावन बलिदानों की
 हर पल लाज निभाएँगे।
आओ आज शपथ यह लें—
 देश प्रथम, फिर अपना मान;
 तन-मन-धन सब अर्पित होगा,
 भारत माँ पर जीवन-कुर्बान।
स्वतंत्रता अमर रहे सदा,
 अमर रहे वीरों का बलिदान।
 जय हिंद! जय भारत! ! जय हो हिंदुस्तान!
डॉ. प्रो. वै. कस्तूरी बाई 
बेंगलूरु 
कर्नाटक

शान्ति / नेहा बागड़ी

शान्ति / नेहा बागड़ी

शान्ति का अर्थ केवल युद्धविराम या  युद्ध का न होना नहीं है।अपितु  ये  वह अवस्था है जहाँ मन में कोलाहल नहीं, दिल में बैर नहीं और समाज में भय नहीं। यह एक ऐसी पूँजी है जिसे न खरीदा जा सकता है, न छीना जा सकता है — सिर्फ महसूस किया जा सकता है। यह व्यक्तिगत चेतना से शुरू होकर वैश्विक स्तर तक पहुँचती है। एक शांत मन और समाज ही विकास, करुणा और सच्चे मानव कल्याण का आधार बन सकते हैं
इसे आंतरिक और बाह्य रूप में व्यक्त कर सकते है। जब हमारा मन ईर्ष्या, लालच और चिंता से मुक्त होता है, तब सच्ची शान्ति मिलती है। गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं — “अशांतस्य कुतः सुखम्” 
अशांत व्यक्ति को सुख कहाँ। अर्थात् जो व्यक्ति अशांत है (जिसका मन स्थिर नहीं है), उसे सुख कहाँ से मिल सकता है?" 
अशान्ति का बीज अक्सर अहंकार, लोभ और अज्ञान में छिपा होता है। 'मैं सही, तू गलत' की ज़िद, 'मेरा ज्यादा, तेरा कम' की होड़, और 'सुनूंगा नहीं, सिर्फ सुनाऊँगा' का रवैया - ये तीनों मिलकर शान्ति की दीवार में दरार डाल देते हैं। आजकल चारों तरफ  फैलती नफरत, अफवाहें और ध्रुवीकरण आज की सबसे बड़ी चुनौती हैं।
तनाव, गुस्सा, नफरत — ये सब बीमारियों की जड़ हैं। शांत मन शरीर को भी निरोग रखता है।  रिश्तों की डोर: परिवार, दोस्ती, पड़ोस — सब शान्ति के बिना बिखर जाते हैं। आने वाली पीढ़ी के लिए: हम जैसा माहौल देंगे, बच्चे वैसा ही सीखेंगे। अगर आज हम शान्ति चुनेंगे, तो कल की दुनिया युद्ध नहीं, संवाद चुनेगी।  जैसे एक दीये से हजारों दीये जलते हैं, वैसे ही एक शांत मन हजारों दिलों को सुकून दे सकता है।

नेहा बागड़ी ,भिवानी (हरियाणा)

आजादी / स्व रचित एवं मौलिक

 आजादी / स्व रचित एवं मौलिक

वीर सपूतों के बलिदान की अमर कहानी है आजादी। 
सोने से सुंदर देश की पावन कुर्बानी है आजादी।। 
वीर सपूतों ने कितने जो लहू बहाये सीमा पर। 
जान की अपनी बाजी लगा दी है सीमा पर।। 
हर एक नागरिक की जिम्मेदारी है आजादी। 
वीर सपूतों के बलिदान की अमर कहानी है आजादी। 
जाँति- धर्म को भूलकर प्रेम हम बढ़ाये देश में। 
जीव- जन्तु की रक्षा हो किसी भी परिवेश में।। 
खुलकर साँसे लेने की अमिट कहानी है आज़ादी। 
वीर सपूतों के बलिदान की अमर कहानी है आजादी।। 
निज स्वार्थों को त्यागकर स्वाभिमान बढ़ाये देश का। 
कर के सुकर्म सतत ही अभिमान बढ़ाये देश का।। 
रग- रग में बसने वाली गौरव की कहानी है आज़ादी। 
वीर सपूतों के बलिदान की अमर कहानी है आज़ादी।। 
हम कभी न भूल जाये त्याग- प्रेम की मिसाल को। 
करे अनुसरण भी शहीदों के जीवन की मिसाल को।। 
भारत माँ के आँचल की जलती कहानी है आजादी। 
वीर सपूतों के बलिदान की अमर कहानी है आज़ादी।। 

स्व रचित एवं मौलिक
डॉ रेखा तिवारी
इंद्रापुरम, गाज़ियाबाद

Saturday, 22 August 2026

वीरों की याद में मोहाली मे किया कवि सम्मेलन

 वीरों की याद में मोहाली मे किया कवि सम्मेलन 

सारा सच (जीरकपुर मोहाली) पंजाब: 15 अगस्त 2026  को आजादी के 80 वें पावन पर्व पर देश के वीरों की याद में *काव्य क़दम साहित्यिक संस्था हरियाणा* द्वारा होटल प्लैटिनम, ओल्ड अम्बाला रोड़ ढकौली में एक कवि सम्मेलन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि मशहूर वीर रस कवि विजेंद्र सिंह चौहान रहे। मंच संचालन आशा रानी द्वारा सफलतापूर्वक किया गया। 
कवि सम्मेलन की शुरुआत बाल कवि अयांश भगवाड़िया ने एक देश भक्ति रचना सुनाकर की। इसके बाद अध्यक्ष बलवान सिंह मानव ने देश भक्ति पर सुनाया - देश से मेरे मुझको प्यार है, ये देश ही तो मेरा श्रृंगार है- और वाहवाही लूटी।
सीमा चहल पुष्प ने नारी शक्ति की महिमा दर्शाई और माहौल में एक नया रंग भर दिया - साड़ी में सिमटी हुई नारी, सारे जमाने पे है भारी। राजीव गुप्ता ने बहुत शानदार प्रस्तुति दी - एक बार नहीं हम सौ बार मरेंगे,  देश के लिए हर बार मरेंगे - सुनाकर मन मोह लिया।
मशहूर गज़लकार अनीता नरवाल ने अपनी शानदार गज़ल यूं सुनाई- आते नहीं हैं ख़्वाब परी के जहान से, बढ़ने लगा है प्यार का खतरा निशान से- और तालियों की गड़गड़ाहट लूटी।
चंडीगढ़ से प्रसिद्ध सर्वेश शायर ने अपनी देश भक्ति इस प्रकार पेश की - आजाद भगत सिंह का हम नाम कैसे भूलें,
कैसे मिली आज़ादी परिणाम कैसे भूलें - और माहौल को देशमय बना दिया। युवा कवयित्री करिश्मा वर्मा ने अपनी शानदार प्रस्तुति इस प्रकार दी - पूर्वजों का लहू मिला माटी में,  आज़ादी नहीं मिली खैरात में। शशि गुरु ने अपनी भावुक प्रस्तुति दी - मुझसे मत पूछो कि भारत कितना महान है - सुनाकर सबको जागरूक किया। मीना जागलान ने बहुत सुंदर प्रस्तुति दी - तिरंगा जब आसमान में लहराता है, हर दिल देश भक्ति से भर जाता है।
 विश्वजीत सिंह शब्द ने देश भक्ति पर आत्मिक मंथन पेश किया - यह देश है कर्मवीरों की भूमि, भारत भाग्य विधाता! - सुनाकर सबको प्रेरित किया। शशि ज़रोडिया ने बहुत सुंदर प्रस्तुति दी - यह देश केवल धूल नहीं पूर्वजों की हुंकार है, यह फ़र्ज़ मोहब्बत रोटी और इंकलाब की धार है।
संदीप भगवाड़िया ने अपनी गज़ल यूं सुनाकर सबका दिल जीता - मेरे जख्मों की तरफ तू भी नज़र करके तो देख, है गुज़रता किस तरह तन्हा सफर करके तो देख। संचालिका आशा रानी ने अपनी शानदार प्रस्तुति इस प्रकार से दी - कागज़ पे आज़ादी और भाषणों के हार हैं, आप भी इस देश में सच पुछो तो लाचार हैं - सुनाकर वाहवाही लूटी। नीरज कुमार गुप्ता ने भी मंच पर अपनी प्रस्तुति दी।आस्था पब्लिक स्कूल अभयपुर पंचकूला से पहुंची कमलेश अध्यापिका ने भी देश भक्ति पर सुंदर संदेश दिया।
अन्य कवियों में बृजेश शर्मा स्नेही ,राजन तेजी सुदामा, राम कुमार वर्मा डॉ अनुपमा हेमा, रवि कटारिया, राकेश भट्ट ने संस्था के माध्यम से देश को एक नया संदेश दिया।
अंत में मुख्य अतिथि ने देश के 80 वें स्वतंत्रता दिवस पर शहीदों को याद करते हुए उनके बलिदान को स्मरण किया। यह बताया कि आज भी देश को भगत सिंह, सुभाष चंद्र , झांसी की रानी, बिस्मिल्लाह खां जैसे वीरों की जरूरत है। इस अवसर पर अपनी देश प्रेम पर रचना सुनाकर आम जनता में नया जोश भर दिया- रावण का संहार न होता, गर उसे अभिमान न होता।
अध्यक्ष बलवान सिंह मानव ने बताया कि - आज भी हर मां भारत माता ही है और भारत माता के बच्चे देश की सीमा पर हमारी सुरक्षा करते हैं। हमें सभी का सम्मान करना चाहिए।
अंत में संस्था ने राष्ट्र गान - जन गण मन अधिनायक गाकर देश प्रेम प्रदर्शित किया। 
कार्यक्रम में पहुंचे आम जन मानस ने भी देश भक्ति से प्रेरित कवि सम्मेलन का आनंद उठाया। भारत माता की जय, वंदे मातरम् से सारा माहौल देशमय हो गया।

वीरगाथा आज़ादी की / डॉमनीषा नाडगौडा

वीरगाथा आज़ादी की / डॉमनीषा नाडगौडा

गाथा बलिदान की भारत के विरोंकी
याद दिलाती है भारत के आजादी की
खून बहाँ जो होली लाल रंग की
जुबाँ पर आज भी महक उस मिटटी की
क़ुरबानी इनकी स्वतंत्रता देश की
किस तरह के दिन थे वो वीर रस से भरे
हर एक के जुबाँ पर नारा था जय भारती का
दि क़ुरबानी हर एक ने किसी न किसी रूप में
किसान कोई जवान कोई था आम नागरिक
हर हिंदुस्थानी में देखा रूप वीर का
गाथा लाल बाल की भगतसिंग राज गुरु की
गांधी नेहरू सावरकर के साहस की
रानी लक्ष्मी बाई रानी चन्नमा के साहस की
ऋणी देश उन विरंगनाओंकी वीरता पर
निछावर भारत पर जान जिनकी
आज भी याद कर  रोमांचित होता कण कण
रखो आबाद इस देश को हे वीर जवानों
विकास की ओर बढ़े हरपल भारत हरदम
आतंकवाद पर विजय पाकर बने विश्वगुरु 
आत्म निर्भर बनें भारत, मिल जुलकर रहे सब रहे सब
लागे याद कर बलिदान इनका
विकास की ओर एक कदम सबका

डॉमनीषा नाडगौडा
Karnataka