Saturday, 3 October 2026

जीवन की सीख - अंकिता जैन अवनी

जीवन की सीख - अंकिता जैन अवनी 

आज हनुमान अंश देखी,
फिल्म बहुत अच्छी है।
इस फिल्म से पांच बातें सीखने को मिलीं,
पहली आप का लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए, आपको पता होना चाहिए कि जीवन में आपको क्या करना है।
दूसरा, आप अपने स्वभाव में रहना सीखो।
तीसरी बात,अपनी ताकत को पहचानो क्योंकि आपके भीतर ही आपकी शक्ति है।
चौथी, भगवान का स्मरण सच्चे विश्वास और मन से करो।
पांचवीं और अंतिम बात,
आसक्ति से बचो क्योंकि आसक्ति केवल आपको फसाती है, मुक्त नहीं करती।
अंत में इस फिल्म को देखकर एहसास हुआ कि भगवान तो है और ये दुनिया केवल उसी की आज्ञा से चलती है।
भगवान ने सबकुछ पहले से निर्धारित करके रखा है। कौन,किससे, कब, कहां मिलेगा और बिछड़ेगा सब पूर्व तय है।
मतलब स्क्रिप्ट भगवान जी ने लिख रखी है हम सब तो केवल अभिनय कर रहे हैं।
जिसका जितना किरदार है वह उतना ही अभिनय करता है।
और सबसे मूर्खतापूर्ण बात ये है कि हम इस भ्रम में रहते हैं कि हमारा किरदार सदा रहेगा।

_ अंकिता जैन अवनी लेखिका/कवयित्री

पारदर्शिता - Dr. K. Suvarna

पारदर्शिता - Dr. K. Suvarna

पारदर्शिता किस तरह होनी चाहिए कहते तो वह स-र पटेल की तरह अंदर के आईना सभी को देखना है दिखाना चाहिए सच्चा और न्याय मानव गुणशील व्यक्ति अपने जीवन के हर एक क्षेत्र में स्नेह में प्रेम में भाईचारा में व्यवसाय में समाज के हर एक क्षेत्र में इसका उपयोग करता है वह डर से ऐसा नहीं करता वह अंतर्मन की साक्षी के लिए करता है यह पाठशाला की शिक्षा नहीं है तथा देखकर सिखाने वाली बात नहीं है यह जन्मसिद्ध अंतर मन की पुकार है| कई युगों से कितने महान है व्यक्तित्व सिद्ध तथा ज्ञानियों का परिचय पारदर्शिता का मूल कारण है एक महान व्यक्ति की पीछे पारदर्शिता महान गुण होता है यह रूडी तथा बलात्कार की वस्तु नहीं है यह एक महान व्यक्तित्व का आदर्श गुना है पारदर्शिता को अपने जीवन में उतरा हुआ व्यक्ति भीड़ में भी पहचाना जाता है यह सर्वश्रेष्ठ गुण तत्काल न रहकर आदत बन जाती है| इस संसार में सभी मनुष्य से यह प्रार्थना करते हैं कि पारदर्शिता का लत सभी को लगना चाहिए|

Dr. K. Suvarna
Karnataka 

आनलाइन संसार -- नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर

आनलाइन संसार -- नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर

आनलाइन जैसा शब्द ठीक वैसा ही व्यवहार आन लाइन आज कल समाज कि जरूरत बन गई है!

जीवन कि छोटी से छोटी बड़ी से बड़ी जरूरतों के लिए आन लाइन  समाज जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा किस्सा बन गया है!

सुई से लेकर सम्भवत हवाई जहाज तक आन लाइन मगाया जा सकता है भुगतान आन लाइन ही किया जा सकता है स्पष्ट है कि

जीवन समाज आन लाइन होकर एक कमरे बंद होकर ऱह गया है!

संचार एवं मिडिया क्रांति के युग में समाचार से लेकर मनोरंजन तथा अध्ययन को भी आन लाइन कर दिया है!

पुस्तक कोई खरीदता नहीं सब कुछ सुलभ है एक मोबाइल के

मध्यम से आन लाइन गोष्ठी सम्मेलन, वर्क फ्रॉम होम आदि कि नव संस्कृति को जन्म दिया है!

आन लाइन से कोई भी व्यवहारिक कार्य करने के लिए दो आवश्यक श्रोत का होना आवश्यक है एक बैंक मे खाता हो दूसरा मोबाइल, कंप्यूटर, या टेबलेट्स,मोबाईल का होना आन लाइन संस्कृति के उद्भव विकास से सुविधाएं बढ़ी है जैसा कि हर नए वैज्ञानिक अविष्कार कि लाभ हानियाँ होती है ठीक उसी प्रकार आन लाइन का प्रयोग भी हानि लाभ के सैद्धांतिक दोष से मुक्त नहीं है!

सोसल मिडिया के प्रयोग मे आन लाइन गेम, आन लाइन रिश्ते का निर्माण बिना कि ठोस आधार के सिर्फ आन लाइन से वैवाहिक सम्बन्ध समाज को अक्सर पीड़ा और दर्द ही देते है!

आन लाइन सुविधाएं भागम भाग के जीवन मे समय कि बचत करता है तो आपके पसंद को सीमित करता है, आन लाइन अपराध को भी जन्म देता है साईबर ठगी इसका ज्वलंत उदाहरण है!

आन लाइन अनाप सनाप सूचनाओं एवं संदेशो से समाज को भ्रमित करने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है!

आनलाइन से समाज और संसार को लाभ भी बहुत है किसी के अंदर यदि कोई प्रतिभा है तो आनलाइन युग पूर्व उसे अपनी प्रतिभा समय समाज मे स्थापित करने मे संघर्ष करते करते कभी कभी जिंदगी बीत जाती थी आन लाइन युग मे अपनी प्रतिभा को विडिओ द्वारा, इंस्टाग्राम द्वारा, फेसबुक द्वारा सोसल मिडिया पर प्रस्तुत कर अल्प समय मे ही लोक प्रिय बनने का असीमित अवसर उपलब्ध है स्थिति यहां तक है कि बच्चे बूढ़े जवान युवा किशोर महिलाए बेटियां सभी अपनी प्रतिभा हुनर को सोसल मिडिया पर आन लाइन प्रेषित कर लोकप्रिय तो हो रहे रही है आय भी अर्जित कर रहे!

आनलाइन संस्कृति का नकारात्मक पक्ष यह है कि समाज कि बौद्धिक क्षमता शारीरिक क्षमता का ह्रास हो रहा है जिसके कारण भावी पीढ़ियों के मनसिक एवं शारीरिक स्तर पर गंभीर प्रभाव पड़ने कि सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता है!

आनलाइन जैसा शब्द ठीक वैसा ही व्यवहार आन लाइन आज कल समाज कि जरूरत बन गई है!

जीवन कि छोटी से छोटी बड़ी से बड़ी जरूरतों के लिए आन लाइन  समाज जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा किस्सा बन गया है!

सुई से लेकर सम्भवत हवाई जहाज तक आन लाइन मगाया जा सकता है भुगतान आन लाइन ही किया जा सकता है स्पष्ट है कि

जीवन समाज आन लाइन होकर एक कमरे बंद होकर ऱह गया है!

संचार एवं मिडिया क्रांति के युग में समाचार से लेकर मनोरंजन तथा अध्ययन को भी आन लाइन कर दिया है!

पुस्तक कोई खरीदता नहीं सब कुछ सुलभ है एक मोबाइल के

मध्यम से आन लाइन गोष्ठी सम्मेलन, वर्क फ्रॉम होम आदि कि नव संस्कृति को जन्म दिया है!

आन लाइन से कोई भी व्यवहारिक कार्य करने के लिए दो आवश्यक श्रोत का होना आवश्यक है एक बैंक मे खाता हो दूसरा मोबाइल, कंप्यूटर, या टेबलेट्स,मोबाईल का होना आन लाइन संस्कृति के उद्भव विकास से सुविधाएं बढ़ी है जैसा कि हर नए वैज्ञानिक अविष्कार कि लाभ हानियाँ होती है ठीक उसी प्रकार आन लाइन का प्रयोग भी हानि लाभ के सैद्धांतिक दोष से मुक्त नहीं है!


सोसल मिडिया के प्रयोग मे आन लाइन गेम, आन लाइन रिश्ते का निर्माण बिना कि ठोस आधार के सिर्फ आन लाइन से वैवाहिक सम्बन्ध समाज को अक्सर पीड़ा और दर्द ही देते है!

आन लाइन सुविधाएं भागम भाग के जीवन मे समय कि बचत करता है तो आपके पसंद को सीमित करता है, आन लाइन अपराध को भी जन्म देता है साईबर ठगी इसका ज्वलंत उदाहरण है!

आन लाइन अनाप सनाप सूचनाओं एवं संदेशो से समाज को भ्रमित करने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है!

आनलाइन से समाज और संसार को लाभ भी बहुत है किसी के अंदर यदि कोई प्रतिभा है तो आनलाइन युग पूर्व उसे अपनी प्रतिभा समय समाज मे स्थापित करने मे संघर्ष करते करते कभी कभी जिंदगी बीत जाती थी आन लाइन युग मे अपनी प्रतिभा को विडिओ द्वारा, इंस्टाग्राम द्वारा, फेसबुक द्वारा सोसल मिडिया पर प्रस्तुत कर अल्प समय मे ही लोक प्रिय बनने का असीमित अवसर उपलब्ध है स्थिति यहां तक है कि बच्चे बूढ़े जवान युवा किशोर महिलाए बेटियां सभी अपनी प्रतिभा हुनर को सोसल मिडिया पर आन लाइन प्रेषित कर लोकप्रिय तो हो रहे रही है आय भी अर्जित कर रहे!

आनलाइन संस्कृति का नकारात्मक पक्ष यह है कि समाज कि बौद्धिक क्षमता शारीरिक क्षमता का ह्रास हो रहा है जिसके कारण भावी पीढ़ियों के मनसिक एवं शारीरिक स्तर पर गंभीर प्रभाव पड़ने कि सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता है!

नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश!! 

Monday, 28 September 2026

ऑनलाइन - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'

ऑनलाइन - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
 
आज ऑनलाइन का बोलबाला है।
ऑनलाइन बड़ा निराला है।
जब कोई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या व्यक्ति किसी कंप्यूटर नेटवर्क या इंटरनेट से जुड़ा होता है, वह ऑनलाइन कहलाता है। 
दुनिया के कोने-कोने की जानकारी, ऑनलाइन से पाया जाता है।

आँख खुलती नहीं, हमारा हाथ जाता है मोबाइल पर।
अपनी फोटो पर लाइक और कमेंट देख, मुस्कान आता है चेहरे पर।
हम आज ऑनलाइन की दुनिया में जी रहे हैं।
ऑनलाइन खरीदारी, ऑनलाइन व्यापार, ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
अब दफ्तर जाने की जरूरत नहीं, घर से काम हो जाता है।
मनुष्य अपनी 
सुविधानुसार कार्य करता, समय भी बच जाता है।
बीमार व्यक्ति, ऑनलाइन परामर्श पा जाता है।
कई चिकित्सकों की सलाह, वह ले पाता है।
हर सुविधा मनुष्य, घर बैठे पा रहा।
ऑनलाइन से मानव उन्नति कर रहा, सफलता की सीढ़ी चढ़ रहा।
ऑनलाइन छात्र पढ़ाई करते, होते हैं सफल।
छात्र प्रगति करते, बढ़ता उनका मनोबल। 
किसी भी चीज की अति, बड़ी बुरी होती है।
ऑनलाइन के प्रयोग में, कुछ सावधानियां रखनी जरूरी है।
तुरंत विश्वास न करें, पूरी छानबीन करें‌।
विज्ञापनों पर न जाए, 
खरीदने के पहले जांच-पड़ताल करें।
ज्यादा ऑनलाइन रहना, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। 
आँख पर असर पड़ता, सर दर्द, गर्दन, पीठ के दर्द का कारण है।
ऑनलाइन ठगी और धोखा घड़ी के शिकार हम होते हैं। 
हम ऑनलाइन की दुनिया में इतना खो जाते हैं, व्यक्तिगत रिश्ते कमजोर होते हैं।
बार-बार हम मोबाइल देखते, एकाग्रता हमारी कम होती।
गाड़ी चलाते समय मोबाइल का उपयोग करने से दुर्घटना होती।
ऑनलाइन पर ज्यादा निर्भर न रहे, आमने-सामने होकर बातें करें। 
कभी-कभी चिट्ठी लिखे, केवल मोबाइल पर मैसेज न करें।
मोबाइल के दोस्त काम कम आते हैं, अपने रिश्तेदार ज्यादा।
व्हाट्सएप, फेसबुक से ज्यादा अपना रिश्ता हमें संभालना है, खुद से करो यह वादा।
कभी-कभी विज्ञापन में जो दिखता है, वह सही नहीं होता।
जब सामान घर आता कभी-कभी वह विज्ञापन जैसा नहीं होता।
ऑनलाइन से पढ़ाई करो, अपना ज्ञान बढ़ाओ।
अच्छी बातें सीखो, 
समाज में नाम कमाओ।
ऑनलाइन रहें, मगर आँख मूँद कर विश्वास न करें।
अपना विवेक का उपयोग करें, तभी पांव आगे धरें।
 
डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
स्वरचित
West Bangal 

आनलाइन - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर

अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारीवाणी साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु 

आनलाइन - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर 

आनलाइन सुविधाओं से
हर सुविधाएं मिल जाती है ।
पैसों की बैंकिंग सेवाओं का
लेन देन आनलाइन होता है ।

आनलाइन शापिंग होती है
पीज़ा वरगर भी आ जाता है ।
खाना जो भी खाना हो सब
आनलाइन ही आ जाता है ।

फेसबुक वाट्सएप गूगल हो
फायदा नुकसान तो होता है ।
चलाने वाले के ऊपर है
क्या उससे हासिल करता है ।

सोशल मीडिया की तकनीक से
घर बैठे ही बहुत हासिल होता है ।
वाट्सएप के माध्यम से सभी को
आनलाइन सब मिल जाता है ।

सारा सच है मोबाइल के माध्यम
फेसबुक वाट्सएप गूगल से जुड़ते हैं।
यूट्यूब इंटरनेट से भी जुड़कर
मोबाइल से हासिल कर सकते हैं ।

साहित्य के क्षेत्र में साहित्यकार
आनलाइन कवि सम्मेलन करते हैं ।
आडियो वीडियो टाइप कविता
फेसबुक वाट्सएप में भेजते हैं ।

3000 आनलाइन कवि सम्मेलनों में 
10000 सम्मान पत्र पाये है ।
मैंने तो आनलाइन सम्मेलनों में 
समय के साथ सम्मान पाते हैं।

सारा सच है आनलाइन सभी
आज कल काम आसान होते हैं ।
आनलाइन सम्मान आ जाते
ऐसे कवियों को फायदा होते हैं ।

आनलाइन मेरे सम्मान आते थे 
साहित्य साथी मजाक उड़ाते थे।
मुक्त होगी जब खुद बने  तब 
बात समझ लो पाये था।

इंटरनेट के माध्यम से लेन देन
काम सभी मोबाइल से होते हैं।
बैंकों में पैसे जमा हो जाते हैं
बिजली के बिल भी भरे जाते हैं।

आनलाइन शापिंग भी होती है
कहीं से भी कोई सामान आ जाता है।
सारा सच आने जाने की जरूरी नही 
आनलाइन पैसा भी चला जाता है ।

गलत काम जो करते हैं
वो लोगों को झूठा फसाते हैं ।
दो नंबर का काम भी करते हैं
नुक़सान सभी को पहुंचाते हैं ।

  महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त
   जबलपुर म प्र