Wednesday, 14 October 2026

योग — आत्मज्योति का अमृतपथ - डॉ। वै। कस्तूरी बाई - कर्नाटक

योग — आत्मज्योति का अमृतपथ - डॉ। वै। कस्तूरी बाई - कर्नाटक

योग केवल आसनों का सीमित अभ्यास नहीं,
 यह आत्मा का परमात्मा से दिव्य संवाद है।
 जहाँ श्वास मंत्र बनती है,
 और मौन स्वयं वेदों का उद्घोष बन जाता है।
रोग जब शरीर पर अपना अधिकार जताता है,
 तब योग अमृत-औषधि बनकर
 प्राणों में नवजीवन का संचार करता है।
 यह केवल अंगों का व्यायाम नहीं,
 अपितु चेतना का जागरण है।
ध्यान वह पावन दीप है,
 जो चंचल मन के अंधकार को हर लेता है।
 जहाँ विचारों का कोलाहल शांत होता है,
 वहीं आत्मा का मधुर स्वर सुनाई देता है।
आसन शरीर की स्थिरता का आधार हैं,
 किन्तु उनका लक्ष्य केवल लचीलापन नहीं;
 वे संयम, संतुलन और साधना के
 दिव्य सोपान हैं।
 शरीर जब अनुशासन का मंदिर बनता है,
 तभी आत्मा उसमें प्रकाशमान देवता की भाँति विराजती है।
स्वास्थ्य केवल रोगों का अभाव नहीं,
 बल्कि तन, मन और प्राण की समरसता है।
 ऊर्जा वही दिव्य अग्नि है,
 जो निराशा की रात्रि को
 आशा के प्रभात में परिवर्तित कर देती है।
शांति बाहर के संसार में नहीं,
 वह अपने ही अंतःकरण की निस्तब्ध सरिता में प्रवाहित होती है।
 योग उसी सरिता तक पहुँचने का
 ऋषियों द्वारा प्रदत्त अमूल्य सेतु है।
आइए,
 प्रतिदिन योग को जीवन का यज्ञ बनाएँ,
 ध्यान को आत्मा का उत्सव बनाएँ,
 आसन को अनुशासन का अलंकार बनाएँ।
 रोग को पराजित कर स्वास्थ्य का वरण करें,
 ऊर्जा को करुणा से,
 और शक्ति को विनम्रता से अलंकृत करें।
तभी मानव जीवन
 केवल जीने की प्रक्रिया नहीं रहेगा,
 वरन् सत्य, शिव और सुंदर की
 अविराम साधना बन जाएगा;
 जहाँ शरीर पवित्र साधन होगा,
 आत्मा दिव्य पथप्रदर्शक होगी,
 और योग मानवता के कल्याण का
 सनातन महामंत्र बनकर
 युग-युगांतर तक आलोक बिखेरता रहेगा।
डॉ। वै। कस्तूरी बाई - कर्नाटक
बेंगलुरु 
कर्नाटक

योग आध्यात्मिक साधना - संगीता अहलावत

योग आध्यात्मिक साधना - संगीता अहलावत 

प्राचीन काल से ही योग आध्यात्मिक साधना का माध्यम रहा है l योग का जनक महर्षि पतंजलि को माना जाता है l योग की परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है l ऋषि मुनियों ने घोर तपस्या से योग का ज्ञान प्राप्त किया है l वेदों, उपनिषदों, भगवद्गीता तथा अन्य भारतीय ग्रंथों में भी योग का उल्लेख मिलता है l 

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2014 में 21 जून को " अंतरराष्ट्रीय योग दिवस" घोषित किया l यह भारत के लिए गौरव की बात है कि उसके प्रयासों से योग को वैश्विक सम्मान मिला l 

योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है जो शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करती है l योग व्यक्ति के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करता है l इससे हमें आत्मानुशासन , आत्मसंयम और आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है l योग से व्यक्ति अपने मन और इंद्रियों पर नियंत्रण करना सिखाता है l योग मनुष्य को स्वयं से, समाज से, प्रकृति से परमात्मा से जोड़ने का कार्य करता है l योग केवल शरीर को स्वस्थ ही नहीं बनाता बल्कि मन को शांत, बुद्धि को स्थिर और आत्मा को जागृत करता है l योग शरीर को स्वस्थ और सुदृढ़ बनाने का सबसे सरल और प्रभावी साधन है l नियमित योगाभ्यास करने से अनेक रोगों से बचा जा सकता है l नियमित योगाभ्यास से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, हृदय रोग तथा पाचन संबंधी समस्याओं से फायदा मिलता है l योग से शरीर में लचीलापन आता है l व्यक्ति के शरीर में ऊर्जा का संचार होता है l

योग मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखता है l योग के अभ्यास से व्यक्ति का ध्यान केंद्रित रहता है l योग व्यक्ति को अपने क्रोध, ईर्ष्या, भय पर नियंत्रण करना सिखाता है l योग मन में सकारात्मक विचारों का विकास करता है l इससे व्यक्ति जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना धैर्य और आत्मविश्वास से कर पाता है l 

अंत में "योग स्वस्थ जीवन का आधार है इसी से चलता सबका सुगम संसार है"l

       - संगीता अहलावत
उत्तर प्रदेश 

आजादी - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त

अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारीवाणी साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु 

 आजादी - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर 

हमारा देश जो कभी
सोने की चिड़िया था
उस देश में सोना लेना
एक सपना सा हो गया है ।

देश के सोने को
अंग्रेज लूट ले गये
बचा खुचा देश में
कौन हड़प कर गये ।
आप क्या जान गये
देश की आजादी को
कितने दशक हो गये ।

परंतु गुलामी आज भी 
गली मोहल्ले चौराहे में
देश में पैर जमाकर बैठी है।
देश में कानून है
कोई मानता ही नही
संविधान है कोई
पढ़ता ही नही ।

अदालतों में न्याय की जगह 
बस तारीख पर तारीख ही 
आम आदमी को मिलती है ।
बड़े जजों के बंगले में बोलो से
भरे नोटों के जले बंडल मिलते हैं ।

मां बहिन बेटियों
की इज्जत सरेआम
चौराहों मे लुटती है ।
न्याय पाना ख्वाब
सा हो गया है ।
बस तारीख पर
तारीख ही मिलती है ।

सबूत और गवाहों
के चक्कर मे कचहरी
चलती रहती है।
भ्रष्टाचार आतंकवाद
भाई भतीजावाद ।

मंहगाई मिलावट
यही तो है हमारे
देश का समाजवाद।

एक अमीर है
अमीर होता जा रहा है
एक गरीब है
गरीब होता जा रहा है
आरक्षण देकर भाई से
भाई को बाटा जा रहा है ।

जातियों के नाम पर
गरीबी का पैमाना
देखा जा रहा है ।

आरक्षण एस सी एस टी एक्ट 
यू जी सी कानून बनाकर 
सवर्णों के बच्चों को 
अपराधी बनाने की साज़िश 
में फंसाने का कानून बना है ।

इन कानूनों के विरूद्ध
सवर्ण आन्दोलन कर रहे है ।
बोट बैंक के खातिर प्रधानमंत्री 
सवर्णों से पक्षपात कर रहे हैं ।

प्रदूषण पर्यावरण
के नाम से करोडों
रूपया खर्च हो रहा है
इसी पैसों मे भ्रष्टाचार
पनपता है बढता है
रेवड़ी की तरह बटता है ।

गंगा की सफाई के
नाम से पैसा निकलता है
बरसात में पानी की बाढ 
की तरह साफ हो जाता है।

प्राइवेट स्कूल कालेजों
  अस्पतालों में लूट मची है 
किसी की पढ़ाई बीमारी से
कोई लेना देना नही है
मनमानी पैसों की लूट मची है।

आरक्षण वाले  माइनस 
40 नंबर में डाक्टर बन रहे हैं।
आरक्षण वाले नौकरी में 
  प्रमोशन में आरक्षण पा रहे हैं।
कलेक्टर एस सांसद विधायक 
भी आरक्षण का फायदा ले रहे है

स्वच्छता अभियान चलता है
नालिया बजबजाती है
झाडू लेकर नेताओ
की फोटो खिचती है ।

बीच बाजार चौराहों में
सुअर कुत्ते लावारिस 
जानवर ज्यादा दिखते है।

यही तो देश कीआजादी है 
जो गली मोहल्ला शहर गांव 
के चौराहो मे दिखती है ।
यही तो हमारे देश आजादी है
देश में गणतंत्र है लोकतंत्र 
यहां हर देशवासी
आजाद है स्वातंत्र है ।

महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त 
    जबलपुर म प्र /

15 अगस्त - वीरेंदर

15 अगस्त - वीरेंदर 

फिर से आ गया 15 अगस्त,
दारू पी सब हो जायेंगे मस्त.
पतंग उड़ाएंगे,शोर मचाएंगे,
ढोल बजायेंगे नाचेंगे जाएंगे.
दिन भर पिएंगे, बियर  शराब,
खूब खाएंगे टिक्के कबाब.
जगह जगह लहरायेंगे तिरंगे झंडे,
स्वतंत्रता दिवस को बना देंगे "फन डे".
पार्टी का होगा पूरा बंदोबस्त,
क्योंकि फिर से आ गया है15 अगस्त ||
क्योंकि फिर से आ गया है15 अगस्त || 

सबको है व्यक्तिगत आजादी की आशा,
इसीलिए तिरंगे की बना दी नयी परिभाषा.
केसरिया कहता, हमेशा रहो दबंग,
श्वेत कहता राजनीती करो, मत करो तुम जंग.
हरा कहता समृद्ध और सजे रहो,
चक्र कहता 24 घंटे बस मज़े लो.
कोने में चुप-चाप खड़ा तिरंगा,
सब अपने में व्यस्त.
क्योंकि फिर से आ गया है15 अगस्त ||
क्योंकि फिर से आ गया है15 अगस्त || 

नेता भी अपने देंगे वही पुराना भाषण,
मिलेगा सबको मकान, मिलेगा सस्ता राशन.
देश भक्तो को झूटी श्रद्धांजलि देंगे,
अपनी नीतियों से सेकड़ो जवानो को मार देंगे.
सुबह लहरायेंगे तिरंगा शाम को करेंगे पार्टी,
जनता को दिखाएंगे  सपने, खुद देखेंगे पिक्चर डर्टी.
नेता रहेगा मस्त जनता होगी पस्त.
क्योंकि फिर से आ गया है15 अगस्त ||
क्योंकि फिर से आ गया है15 अगस्त || 

अपने अपने लिए सब तिरंगा लहराते,
सरकारी छुट्टी के रूप में 15 अगस्त मनाते.
भ्रष्टाचार ने कर दिया देश का बंटाधार,
आजादी के परवानो का क्या स्वप्न होगा साकार?
क्या ऐसी आजादी के लिए वो लडे थे?
अब सोचते होंगे के हम गुलाम भले थे,
देश की किसी को परवाह नहीं,
देशभक्त बनने की अब चाह नहीं.
देश की छोड़ो खाओ,गरम समोसे,
देश तो अपना चलता है भाई राम भरोसे.
घूमने का बनाते है कोई प्लान जबरदस्त,
क्योंकि फिर से आ गया है15 अगस्त ||
क्योंकि फिर से आ गया है15 अगस्त ||
विरेंद्र

वीरेंदर 
दिल्ली 

आज़ादी - कमल धमीजा

आज़ादी - कमल धमीजा

सारी दुनियाँ से प्यारा अपनी पहचान तिरंगा है। 
भारत माँ के वीर सपूतों की मुस्कान तिरंगा है।। 

केसरिया बलिदान  सिखाता श्वेत सदा शुभ शांति लिए, 
 हर भारत वासी के दिल में, है अभिमान तिरंगा है। 

प्यारा भारत देश हमारा जग में है सबसे न्यारा, 
बच्चे बूढ़े नर नारी हम सब की जान तिरंगा है। 

गंगा यमुना पर्वत सागर  इनकी गौरव गाथा है, 
वीरों के साहस की जग में शुभ सम्मान तिरंगा है। 

आज़ादी  के मतवालों ने फंदे चूम लिए फांसी, 
हॅंसते- हॅंसते गाते जाते उनकी शान तिरंगा है। 

स्वरचित मौलिक अधिकार रचना
कमल धमीजा
फरीदाबाद- हरियाणा