Saturday, 2 May 2026

गुरु - कमल धमीजा

गुरु - कमल धमीजा

अगर गुरु ना होते 
तो ना जाने हम
 किस गर्त में होते 
ना होती किताबें, 
 ना इस हाल में होते
पड़े होते कहीं अंधेरों में 
इक रोशनी की तलाश में

गुरु वो रस्सी है 
जो खैंच लाता है 
गहरे कुॅंए से डूबते 
हुए इंसान को , 
और दिखा देता है 
सूरज की रशिमों को

गुरु वो आंवले का पेड़ है
 जिसकी मिठास
 खाने के बाद
 याद आती है और, 
 जिंदगी संवर जाती है

स्वरचित मौलिक अधिकार रचना
कमल धमीजा
फरीदाबाद- हरियाणा

नेता - डा अनन्तराम चौबे अनन्त

अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारी वाणी 

नेता - डा अनन्तराम चौबे अनन्त 

नेता राजनीति सभी  करते हैं
कहते हैं राजनीत गंदी होती है ।
नेता ऐसी राजनीति  करते हैं
जो हर पार्टी में ही रहते हैं ।

दल बदलू नेता ही अक्सर
सत्ता की कुर्सी पा जाते हैं ।
राजनीति में शतरंज की
चाल हमेशा चलते रहते हैं ।

सत्ता की कुर्सी में रहकर
करोड़ों के घोटाले करते हैं ।
घोटालों से बचने के लिए वो
दल-बदल की राजनीति चलते हैं ।

राजनीति के सब हथकंडे
बस राजनेता ही जानते हैं ।
भोली भाली जनता के बोट से
सभी नेता चुनाव जीत जाते हैं ।

नेता बनते राजनीति से
राजनीति अजब निराली है।
अंगूठा छाप एक नेता की भी
अपनी क्या शान निराली है ।

ज्यादातर अपराधी नेता
सांसद विधायक बनते हैं ।
चुनाव जीत कर सत्ता की
सारा सच कुर्सी पा जाते हैं ।

सत्ताधारी पार्टी का नेता
जो मंत्रियों के चमचे होते हैं ।
बड़े बड़े अफसरों की भी
सारा सच कुर्सी हिला देते हैं ।

राजनैतिक पार्टियां हमेशा
अपना उल्लू सीधा करती हैं ।
सत्ता की कुर्सी पाने चुनाव में
हर हथकंडे इसमें अपनाती है ।

देश में चुनाव में सभी पार्टियां
सत्ता की कुर्सी पाने लड़ती हैं ।
सारा सच है पूरा जोर लगाकर
चुनाव प्रचार पर जोर देती  हैं ।

नेता चुनाव में भले लड़ते हैं
हार जीत भी होती रहती है ।
छींटा कसी आपस में करते
नेताओं की मजबूरी होती है ।

सत्ता में जो भी पार्टी आती है
अपने हिसाब से कानून बनाते हैं ।
सारा सच है नेता बनने में इनको
शिक्षा के मापदंड क्यों नहीं होते हैं ।

अनपढ़ भी सांसद विधायक हैं
मंत्री में शिक्षा का मापदंड नही है ।
शिक्षा से कोई अवरोध न आये
ऐसा कानून भी बनाते ही नही हैं ।

प्रदेश का चुनाव  या देश का हो
राजनीति सब आपस में करते हैं ।
हाथ जोड़ कर बोट मांगते हैं
जाति धर्म की राजनीति करते हैं।

सांसद विधायक मंत्री बनने में
बी ए की शिक्षा होना जरूरी है ।
सारे सच की बात कहूं चुनाव में
उच्च शिक्षा का मापदंड जरूरी है ।

खानदानी राजनीति चलती है
पिता के बाद पुत्र नेता बनते है ।
कोई कोई तो पति-पत्नी पुत्र बहू
पूरा परिवार ही चुनाव लड़ते  हैं।

पत्नी यदि पार्षद बन गई
पूरा काम पति ही करते हैं ।
पत्नी का बस नाम रहता है
काम पति सब संभालते हैं 

महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त
    जबलपुर म प्र

लोकतंत्र का लहू - Dr. Pro. Y. Kasturi Bai

लोकतंत्र का लहू - Dr. Pro. Y. Kasturi Bai
***************

दल बदलू दरबारों में,
वफ़ा की कीमत लगती है रोज़,
जहाँ आत्मा गिरवी रखी जाती है,
और सौदे होते हैं बंद कमरों में, बेआवाज़।

धोखेबाज़ मुस्कानों का यह मेला,
जहाँ हर चेहरा मुखौटा है,
जनता को सपनों का झुनझुना देकर,
पीछे से सत्ता का पूरा खेल होता है।

चालबाज़ी इनके खून में है,
साज़िश इनकी साँसों में,
हर वादा एक जाल है,
हर भाषण एक धोखा।

ग़द्दार अब दुश्मन नहीं कहलाते,
वे “माननीय” बन जाते हैं,
जो देश को बेचकर भी,
देशभक्ति के गीत गाते हैं।

पलटू इरादों की यह राजनीति,
जहाँ सिद्धांत रोज़ मरते हैं,
कल जो गालियाँ देते थे एक-दूसरे को,
आज साथ बैठकर सत्ता की रोटियाँ सेंकते हैं।

बेईमानी अब शर्म नहीं,
बल्कि योग्यता का प्रमाण बन गई है,
जो जितना बड़ा झूठ बोले,
वही सबसे बड़ा नेता बन गया है।

मौक़ापरस्तों की यह भीड़,
हर लहर के साथ बहती है,
जहाँ न विचार हैं, न आदर्श,
बस कुर्सी की भूख ही सब कुछ कहती है।

विश्वासघात अब रिवाज़ है,
जनता सिर्फ एक सीढ़ी है,
जिस पर चढ़कर ये लोग,
फिर उसी सीढ़ी को तोड़ देते हैं।

धन का लालच, पद की प्यास,
इनकी नसों में ज़हर बन बहती है,
देश की मिट्टी, माँ की ममता,
सब इनकी नज़रों में सस्ती है।

कुटुंब-वारसत्व का यह खेल,
लोकतंत्र का गला घोंट रहा है,
जहाँ बेटा, बेटी, दामाद—
सब कुर्सी के वारिस बनते जा रहे हैं।

अत्याचार की आंधी में,
गरीब की चीख दब जाती है,
और मीडिया—जो सच का प्रहरी था,
अब सत्ता का ढोलकिया बन जाता है।

चुनाव अब त्योहार नहीं,
एक व्यापार बन चुका है,
जहाँ वोट बिकते हैं नोटों में,
और जनमत का सौदा खुलेआम होता है।

प्रजा की पीड़ा अब चीख बन चुकी है,
पर सुनने वाला कोई नहीं,
हर गली में सवाल खड़े हैं,
पर जवाब देने वाला कोई नहीं।

देश की तरक्की रो रही है,
विकास दम तोड़ रहा है,
क्योंकि जिन हाथों में बागडोर है,
वही जड़ें काटने में लगे हैं।

ये नेता नहीं—
यह व्यवस्था के दलाल हैं,
जो भविष्य को गिरवी रखकर,
वर्तमान में ऐश कर रहे हैं।

पर सुन लो, ऐ सत्ता के सौदागरों—
इतिहास तुम्हें माफ़ नहीं करेगा,
जब जनता का सब्र टूटेगा,
तो हर सिंहासन राख में बदल जाएगा।

वह दिन आएगा—
जब झूठ के महल गिरेंगे,
और सच की एक चिंगारी,
तुम्हारे साम्राज्य को जला देगी।
Dr. Pro. Y. Kasturi Bai
Bengaluru 
Karnataka

विश्व हास्य दिवस - जौली अंकल

विश्व हास्य दिवस - जौली अंकल

खुशियों का अनमोल उपहार
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में इंसान इतना व्यस्त हो गया है कि वह दिल खोलकर हँसना ही भूल गया है। लोग अक्सर चेहरों पर गंभीरता का मुखौटा ओढ़े रहते हैं, जैसे पूरी दुनिया का बोझ उन्हीं के कंधों पर हो। विश्व हास्य दिवस हमें याद दिलाता है कि हँसना कोई शौक नहीं, बल्कि जीवन की एक अनिवार्य ज़रूरत है। हँसी वह इकलौती 'सरकारी स्कीम' है जिसमें कोई टैक्स नहीं लगता और फायदा हमेशा सौ प्रतिशत मिलता है। स्वामी विवेकानंद जी ने भी कहा था कि लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको, और आज हमारा लक्ष्य केवल हँसना और हँसाना होना चाहिए। खुशहाल जीवन वही है जहाँ हर साँस में आनंद हो और छोटी-छोटी बातें भी आपके चेहरे पर मुस्कान ले आएं। याद रखिए, दुख के बादल तो मौसम की तरह आते-जाते रहेंगे, लेकिन आपका मन सूरज की तरह चमकना चाहिए।

अपनी खुशियों को बरकरार रखने के लिए खुद से एक वादा करें कि आप अपने क्रोध और भावनाओं पर नियंत्रण रखेंगे। यदि कभी बेवजह गुस्सा या उदासी आए, तो गहरी साँस लें, डायरी लिखें या किसी करीबी दोस्त से बात करें। तनाव कम करने के लिए सुबह गुनगुना पानी पिएं और अपना पसंदीदा संगीत सुनें। जीवन में यात्राओं को महत्व दें क्योंकि नई जगहें नई सोच पैदा करती हैं। दोस्तों के साथ समय बिताना और 'ग्रैटिट्यूड डायरी' (शुक्रगुज़ारी की डायरी) लिखना हँसी की आदत डालने के बेहतरीन तरीके हैं। अपने पुराने दबे हुए शौक, जैसे गाना या नाचना, फिर से ज़िंदा करें। घर का माहौल कैसा भी हो, अपनी मुस्कान को फीका न पड़ने दें, क्योंकि यह खुश रहने का एक गहरा मनोवैज्ञानिक रहस्य है।

विश्व हास्य दिवस पर हमें सकारात्मकता फैलाने का संकल्प लेना चाहिए। अपनी खुशी के लिए बाहरी वस्तुओं पर निर्भर रहने के बजाय अपने भीतर झाँकें। अपनी ज़िंदगी को बेहतर बनाने के लिए 'लाफ्टर क्लब' से जुड़ें और वहाँ सीखी बातें दूसरों से साझा करें। जीवन को हँसी के फूलों से सजाना ही असली बुद्धिमानी है। आज से पाँच सरल कदम उठाएं: रोज़ लाफ्टर क्लब में जाकर 10-15 मिनट बिना वजह हँसें, पुराने दोस्तों से बात करें, अपने शौक पूरे करें, मधुर संगीत सुनें और रात को सोने से पहले दिन की अच्छी बातों के लिए ईश्वर का धन्यवाद करें। 

अंत में, यह याद रखना ज़रूरी है कि हँसी वह अनमोल चीज़ है जिसे जितना बाँटोगे, उतनी ही बढ़ेगी। अपने चेहरे की प्राकृतिक चमक को कभी कम न होने दें, क्योंकि आपका एक ठहाका हज़ारों गमों की अचूक दवा है। अपनी खुशियों की दुकान के मालिक खुद बनिए और अपनी मुस्कुराहट मुफ्त में बाँटिए। जब आप दिल से हँसते हैं, तो पूरा ब्रह्मांड आपके साथ मुस्कुराता है। नकारात्मकता फैलाने के बजाय हँसी के दूत बनिए, क्योंकि आपकी एक छोटी सी मुस्कान किसी मायूस व्यक्ति के जीवन में उम्मीद जगा सकती है। अपने भीतर के उस बच्चे को हमेशा ज़िंदा रखें जो बिना किसी कारण के हँसना जानता है। हँसी ही वह संजीवनी है जो मुश्किल समय में आपको मज़बूत बनाए रखेगी। सदा मुस्कुराते रहें और दूसरों को भी खुश रखें। जौली अंकल का वादा है कि यदि आप इन छोटे बदलावों को अपनाएंगे, तो आपका हर सामान्य दिन भी 'विश्व हास्य दिवस' बन जाएगा और जीवन में खुशियों की बहार आ जाएगी।

- जौली अंकल 
दिल्ली 

मन बावरा,मन चंचल - उमेश नाग

मन बावरा,मन चंचल - उमेश नागभागम भाग करें;

कहता है कुछ करता है कुछ 
और रमता कहीं ओर है।
 न चाहूं मैं सोना चांदी,
  न चाहूं मैं ध्यान समाधि।
   मैं तो हूं सामाजिक प्राणी,
    त्रिगुण है भाव मेरा।
    सद्-चित-आंनद में ही 
     रमे मन मेरा,
      यही ध्येय है मेरा।
       मोह-मद-लोभ के-
       चाल से,
       सदा दूर रहें मन मेरा।
       हैं चाहत कि संकलन -
       वृत्ति से दूर रहूं,
       उदारता और विकलन-
       में ही रहे मन मेरा।
       असत् से सत की ओर
       गतिमान हो,
       समदृष्टा,ज्ञेय और ज्ञाता 
       हो मेरा।
       न कोई प्रतिद्वंद्वी हो- 
       न कोई बेरी,
       समदृष्टा व स्नेहशील हो
       यें बावरा - चंचल मन 
        मेरा।

                  श्रीमती उमेश नाग जयपुर राजस्थान