रावण - नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
रावण को बुराई का प्रतीक माना जाता है जबकि रावण ने स्वंय मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम से
युद्ध करने कि चुनौती नहीं प्रस्तुत किया उसके सामने सिवा युद्ध के कोई विकल्प था ही नहीं!
ज़ब विदेह ने शिव धनुष भंग करने वाले से पुत्री सीता से विवाह कि प्रतिज्ञा कि तब महर्षि विश्वमित्र के साथ राम लक्ष्मण बिदेह दरबार मे धनुष भंग मे दर्शक रूप मे पहुंचे जबकि तत्कालीन बड़े -बड़े राज राजकुमार सीता स्वयंम्बर मे सहभागी के रूप मे पहुंचे जिसमे भगवान शिव के मानस पुत्र वाणा सुर, रावण दोनों भी गए थे किन्तु दोनों ही भगवान शिव के धनुष को प्रणाम किया और लौट गए भगवान शिव के भक्त मर्यादा पुरुषोत्तम भी भगवान शिव का धनुष भंग किया और सीता से
विवाह किया!
रावण कि बहन सूप नखा द्वारा राम लक्ष्मण के समक्ष विवाह करने के प्रस्ताव व दबाव बनाने के बदले लखन ने सूप नखा का नाक कान काट दिया क्या यह न्यायोचित था? क्या यह नारी का अपमान नहीं है? धार्मिक सत्यार्थ के परिपेक्ष मे देखा जाय तो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने ऋषियों को असुर विहीन पृथ्वी करने कि प्रतिज्ञा किया था अपनी प्रतिज्ञा कि पूर्णता के लिए
रावण को चुनौती देकर उसे युद्ध के लिए लालकरना ही उद्देश्य था
मर्यादा पुरुषोत्तम होते हुए भी लघु भ्राता लक्ष्मण को नारी सूप नखा का नाक कान काटने का अमर्यादित आदेश दिया क्योंकि रावण को चुनौती देकर युद्ध भूमि मे उतारने का स्पष्ट अर्थ था उससे पूर्व पृथ्वी पर उसके बहुत बड़े असुर कुल का विनाश करना आवश्यक था जिसकी शुरुआत खर, दुशन, से होते हुए अहिरावण, मरीच, कालनेमी, कुम्भकर्ण, मेघनाथ सहित पूरा रावण का बहुत बड़ा कुटुंब था जिसके समापन के बाद ही रावण स्वंय युद्ध मे उतरा!
रावण का अंत मे विभीषण का कारक बनाना एक संयोग ही था
सच्चाई रावण स्वंय जनता था उसके अंत का कारण उन महर्षि ऋषियों कि पीड़ा आंसू था जिनसे कर लेकर उनका रक्त घड़े मे एकत्र कर विदेह राज्य कि सीमा मे गाड़ दिया था जिससे सीता उसके कुल के विनाश का कारण बन कर जन्मी थी!
भगवान राम का अवतार असुर बिहीन पृथ्वी करने का संकल्प पृथ्वी से सीता का अवतरण हुआ!
धर्म अधर्म सत्य असत्य यही था जिसके कारण ज्ञानी, महान पंडित उत्तम कुल मे जन्मा अनन्य शिव भक्त दस बार स्वंय का शीश भगवान शिव को अर्पण करने किया कैलास उठाया और सभी ग्रह नक्षत्र देवताओं को पराजित किया रावण बहुत बड़ा भविष्य वक्ता एवं अहंकारी था!
उसके द्वारा रचित रावण संघीता भरतीय ज्योतिष का दुर्लभ ग्रन्थ है!
वर्तमान समय और रावण कि तुलना गलत है रावण पराक्रमी विद्वान, और महान शिव भक्त था
उत्तम कुल मे जन्मा असुर अवश्य
था!!
नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
गोरखपुर
उत्तर प्रदेश!!


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जय श्रीराम! जय विजयादशमी!