Tuesday, 18 August 2026

समझौता / संगीता अहलावत

 समझौता / संगीता अहलावत

जब व्यक्तियों के विचारों में भिन्नता होती है फिर संबंधों को निभाया जाता है तो उस व्यवहार को समझौता कहा जाता है l 
प्रत्येक व्यक्ति अपने में भिन्न होता है l उसकी पसंद, जरूरत, उसकी चाहत सब एक दूसरे से अलग होता है l परिवार हो चाहे या घर के बाहर का समाज, हर जगह जब आप एक ध्येय से चलते हैं तो कई बातों में भिन्नता होने पर भी एक राय या एक फैंसले पर आना पड़ता है l 
परिवार में अगर पाँच सदस्य हैं तो भी सभी पसंद उनकी खुशी, उनकी सोच सब अलग होता है लेकिन सभी लोग मिलजुलकर रहते हैं l ऐसे ही जब आप नौकरी करते हैं या व्यवसाय करते है आपको हर जगह दो बातें सुननी पड़ती है और उनकी बात चाहे अनचाहे  माननी पड़ जाती है l समझौते को केवल झुकना नहीं माना जा सकता है, बल्कि धैर्य, समझदारी से कुछ बातों को मानना और एक साथ मिलकर काम को भी कहा जा सकता है l कभी - कभी समझौता थोड़ा सा किसी के न्यायपूर्ण हो सकता है और किसी के लिए अन्यायपूर्ण भी हो सकता है और किसी के लिए अन्यायपूर्ण भी हो सकता है l समझौता तभी अच्छा होता है जब किसी को इसका नकारात्मक पहलू झेलना न पड़े l ये भी कहा जा सकता है कि समझौता जीवन का अनुपम पहलू है जिसकी वजह से कई समस्याओं का समाधान भी होता है l जैसे अगर कोई व्यक्ति आक्रामक प्रवृत्ति का होने के कारण जिद्दी भी हो और वह अनैतिक माँग या अनैतिक कार्यों में लग जाए तो समाज में अशांति और कुकृत्य भी हो सकता है l 
एक दूसरे का सहयोग करना भी समझौते की कड़ी है l घर हो या कार्यस्थल, शिक्षा क्षेत्र, स्वास्थ महकमा या सुरक्षा से संबंधित विभाग, कहीं पर भी बिना समझौते या सहयोग के काम सफल नहीं हो सकता है l कंपनी हो या व्यवसाय, राजनीति, सामाजिक कार्य बिना टीमवर्क कार्य सरलता से हो जाए ऐसी संभावना भी नहीं की जा सकती है l 
समझौते के देखे जाएं तो बहुत सारे 4फायदे भी हैं जैसे इसके कारण गलतफहमियां दूर होती हैं l संवाद से समाधान होता है l तनाव दूर होता है और इस वजह से सभी मिलजुल कर कार्य करते है, लेकिन यहाँ पर ये भी मानना होगा कि अगर समझौते में अपमान, अन्याय, झूठ और नैतिक मूल्यों का पतन हो तो ऐसे समझौतों को स्वीकार नहीं करना चाहिए l 
अंत में समझौता वही अच्छा होता है जिसमें सम्मान कायम रहता है, अन्याय नहीं होता है l जिसमें एक दूसरे के हित का ध्यान रखा जाता है और जिस समझौते से जीवन खुशहाल होता है l 
समझौते की सफलता का श्रेय छोटे- छोटे मतभेदों को दूर कर खुशियों को बटोर कर जीने में है l

          - संगीता अहलावत
उत्तर प्रदेश 

नया दौर: कॉकरोच पार्टी और Gen-Z का धमाका / जौली अंकल

     

                                  नया दौर: कॉकरोच पार्टी और Gen-Z का धमाका / जौली अंकल

 
आजकल देश की हवा में कुछ अलग ही ताज़गी देखने को मिल रही है। वही पुरानी सियासी गपशप और वही टी-स्टॉल वाली बहसें हैं, लेकिन इस बार कहानी में एक बड़ा मोड़ आ चुका है। सालों से हमारे देश का आम आदमी एक आदर्श मौनव्रती बना हुआ था। उसने सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे, बिल भरे, टैक्स दिए और चुपचाप सिर झुकाकर निकल गया। सरकारें भी आराम से कुंभकर्णी नींद सो रही थीं, क्योंकि उन्हें पता था कि जनता के पास सवाल पूछने की फुरसत ही कहाँ है। लेकिन अब पर्दा उठ चुका है और मंच पर आज की नई Gen-Z पीढ़ी की धमाकेदार एंट्री हो चुकी है। इस नई पीढ़ी ने वह अद्भुत कार्य कर दिखाया है जो बड़े-बड़े राजनेता भी वर्षों में नहीं कर पाए। इन्होंने सोती हुई सत्ता को झकझोर कर जगा दिया है और आम आदमी को उसकी खोई हुई आवाज़ पुनः लौटा दी है।
 
इस नए दौर की सबसे दिलचस्प और क्रांतिकारी उपज कॉकरोच पार्टी का जन्म है। अब आप सोचेंगे कि भला कॉकरोच पार्टी का राजनीति से क्या संबंध हो सकता है। ज़रा गहराई से विचार कीजिए। कॉकरोच वह जीव है जिसे आप जितना भी दबाने का प्रयास करें, वह किसी भी कोने या दरार से बाहर निकल ही आता है। ठीक उसी प्रकार, आज का युवा किसी भी तानाशाही या उपेक्षा के आगे झुकने वाला नहीं है। सोशल मीडिया के डिजिटल माध्यमों से लेकर सड़कों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों तक, युवाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें नज़रअंदाज़ करना अब किसी के लिए भी संभव नहीं है। अब प्रत्येक राजनेता और प्रशासनिक तंत्र को यह भली-भांति समझ आ गया है कि देश की सबसे बड़ी सामर्थ्य कोई कागज़ी फाइलें नहीं, बल्कि इस देश की युवा शक्ति है। Gen-Z का यह आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प सच में अनुकरणीय है।
 
यहाँ हमारे आदरणीय अभिभावकों को भी अपने दृष्टिकोण में थोड़ा परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। प्रायः घर के बुजुर्ग बच्चों को सलाह देते थे कि इन पचड़ों में मत पड़ो और केवल अपनी पढ़ाई व नौकरी पर ध्यान दो। अब वह समय बीत चुका है। बच्चों को अधिक संवेदनशील या भयभीत मत बनाइए। उन्हें प्रारंभिक जीवन से ही अपने न्यायसंगत अधिकारों के लिए तत्पर रहना और निर्भीकता से संवाद करना सिखाइए। यदि बचपन में अपने अधिकारों के लिए बोलना नहीं सीखा, तो भविष्य में समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को निभाना कठिन हो जाएगा। देश का युवा यदि आज अपनी बात स्पष्टता से रख रहा है, तो यह उसकी बदतमीज़ी नहीं, अपितु एक सशक्त और जागरूक राष्ट्र के निर्माण का संकेत है।
 
दूसरी ओर हमारी सरकारों को भी यह तथ्य स्वीकार करना होगा कि जनता ने यदि आपको जनप्रतिनिधि चुना है, तो आपकी प्रथम प्राथमिकता जनता के प्रति पूर्ण जवाबदेही होनी चाहिए। चुनाव के समय तो हाथ जोड़कर जनता जनार्दन के समक्ष नतमस्तक हुआ जाता है, परंतु सत्ता प्राप्त होते ही जनहित को पृष्ठभूमि में धकेल देना उचित नहीं है। अब कोई भी नया नियम, नीति या योजना लागू करने से पूर्व यह गहन विचार करना आवश्यक है कि क्या यह निर्णय वास्तव में जनकल्याण के अनुकूल है या नहीं। आधुनिक लोकतंत्र में एकतरफा आदेशों से शासन नहीं चलाया जा सकता। अब तो आपसी समन्वय, निरंतर संवाद और पूर्ण पारदर्शिता से ही कुशल प्रशासन संभव है।
 
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक स्वस्थ लोकतंत्र में प्रश्न पूछने की संस्कृति को सदैव प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। यदि कोई जागरूक नागरिक या युवा सरकार से विकास कार्य अथवा सार्वजनिक नीतियों पर प्रश्न करता है, तो उसे किसी भी प्रकार की नकारात्मक संज्ञा देना सरासर अनुचित है। तर्कसंगत प्रश्न पूछना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, कोई राष्ट्रविरोधी कृत्य नहीं। लोकतंत्र की वास्तविक सुंदरता इसी में निहित है कि जनता निसंकोच प्रश्न करे और सरकार पूर्ण विनम्रता व उत्तरदायित्व के साथ उसका समाधान प्रस्तुत करे। जौली अंकल भी इस बात को मानते है की इस नए दौर ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब देश का युवा संकल्पबद्ध होकर जागृत होता है, तो परिवर्तन की एक नई कहानी लिखी जाती है। इसलिए मुस्कुराते रहिए, जागरूक बने रहिए और इस नए दौर की सकारात्मक ऊर्जा का मज़ा लीजिए।
- जौली अंकल

भक्ति / डा अनन्तराम चौबे

 अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारी वाणी 

साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु 
विषय... भक्ति 
दिनांक.. 11/8/2026
नाम.. महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर मध्यप्रदेश 
कविता...

       भक्ति 

भक्त और भगवान के बीच 
भक्ति भावना आ गई ।

सवरी की भक्ति को देखो
जूठे बेर खिलाती गई ।

भक्त की ऐसी भक्ति भावना 
भक्त के साथ में हो गई ।

भक्ति कर लो राम नाम की
जीवन सफल हो जायेगा ।

सीताराम भजन करो
हर मुश्किल कट जायेगी ।

पत्थर की थी अहिल्याबाई
चरण के छूते तर गई भाई ।

राम नाम की ऐसी ही भक्ति
पत्थर भी पानी में तेरे भाई । 

जय श्रीराम का नाम वो लेकर 
कोई कार्य शुरू सब करते हैं ।

सिवरी की कुटिया में जाकर
जूठे बेर सिवरी के खाएं ।

श्रीराम के दर्शन पाकर ही
सिल्ली भी व्रह्मलीन हो गई 

जात पात का भेद न करते
मर्यादा में अपनी रहते ।

महाबली बजरंग बली भी
राम नाम की भक्ति करते ।

भक्ति से भगवान बने थे ।
ऐसे वो बजरंग बली थे ।

सियाराम के प्रिय भक्त थे ।
भक्ति का वो मार्ग चुने थे ।

बुद्धि विवेक दाता है
शिव अंश अवतारी है ।

राम काज में समर्पित हैं
ऐसे वो हित कारी  हैं ।

विभीषण भी राम भक्त थे
श्रीराम राम के कृपापात्र बने।

रावण की मृत्यु के बाद में
लंका के राजा भी बने ।

मीरा बाई ने भक्ति की थी 
जहर हलाहल पी गई थी ।

भगवान की भक्ति ऐसी की
जहर पीकर भी जान बची थी ।

भक्त प्रहलाद ने बचपन से ही 
भगवान की भक्ति की थी ।

अपने ही पिता से कष्ट पाए
होलिका दहन में भी जान बची थी 

ईश्वर की जो भक्ति करता 
मोक्ष भी वही पा जाता है ।

सारे दुख संकट दूर हो जाते
जीवन सफल हो जाता है ।

मां पार्वती ने शिव भक्ति करके
शिव शंकर को पति रूप में पाया ।

शिव शंकर की अर्धांगिनी बनकर 
मां जगत जननी स्वरूप पाया  ।

 महाकवि अनन्तराम चौबे अनन्त 
   जबलपुर म प्र /8354/
        11/8/2026
लंदन यू एस ए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर

गंगाजल / डॉ० उषा पाण्डेय

 गंगाजल / डॉ० उषा पाण्डेय

गंगाजल होता पवित्र, है यह अमृत समान।
गंगा जी को हम माँ कहते, उत्तम है गंगा स्नान।
भगीरथ जी गंगा जी को धरती पर लाये, भागीरथी नाम मिला।
शिव जी ने गंगा जी के प्रचंड वेग को, अपनी जटाओं में रोक दिया।
अपनी जटा से शिवजी ने, पृथ्वी पर गंगा की धार को   किया प्रवाहित।
भगीरथ जी के पूर्वजों को मुक्ति मिली, गंगा जी पृथ्वी पर बहीं संयमित।
गंगाजल कभी खराब नहीं होता, गंगाजल में ऑक्सीजन रहता बहुतायत।
गंगाजल हर हिंदू के लिए, रखता है बहुत अहमियत।
हमारी आस्था का है प्रतीक गंगा जल, हर घर मे पाया जाता।
शुभ कार्य में गंगाजल, उपयोग में लाया जाता।
'गंग सकल मुद मंगल मूला। सब सुख करनि हरनि सब सूला।' तुलसीदास जी ने बताया। 
जय जय भागीरथ नन्दिनी, मुनि-चय चकोर चन्दिनी,
विनय पत्रिका में बतलाया।
मन चंगा तो कठौती में गंगा' संत गुरु रविदास जी हमें बता गए।
साधारण जल भी गंगाजल हो जाता है, यदि उसमें दो-चार बूंद गंगाजल का पड़ता है।
गंगाजल से ही, मानव का पाप धुलता है।
गंगाजल के छिड़काव से, नकारात्मकता दूर होती, सकारात्मक उर्जा मिलती है।
मोक्षदायिनी गंगा, हमारा स्वास्थ्य ठीक रखती है। 
गंगा में हम डुबकी लगाते, शांति हम पाते।
हर हर गंगे, जय माँ गंगे, जयकारा हम सब खूब लगाते।
देवताओं का अभिषेक, गंगाजल से किया जाता।
किसी पूजा के पहले, गंगाजल से स्वयं को शुद्ध किया जाता।
गंगाजल में अनेक, औषधीय गुण होता।
गंगाजल की है विशेषता, गंगाजल कभी खराब नहीं होता।
गंगाजल शिवलिंग पर चढ़ता, करते हम गंगाजल से अभिषेक।
बुरा ख्याल न मन में आता, जागता हमारा विवेक।
गंगाजल पवित्र होता, 
इसे जमीन पर रखें नहीं।
तांबे, चांदी या कांच की शीशी में गंगाजल, ऊपर रखना है सही।
गंगाजल क्यो खराब न होता, 
कई परीक्षण किया गया।
गंगाजल में बैक्टीरियोफेज वायरस होता, हानिकारक बैक्टीरिया रहने नहीं देता,
वैज्ञानिकों ने अपने प्रयोग में पाया।
गंगाजल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता, आयुर्वेद  है ऐसा कहता।
गंगाजल में सल्फर खूब होता, जिवाणुओं की वृद्धि रोकता।
गंगा में गंदगी पड़ती, हमें इसे रोकना होगा।
नमामि गंगे जैसे कार्यक्रमों में,
सहयोग करना होगा।
गंदगी गंगा में न डालें, बच्चों को समझाना होगा। 
गंगा स्वच्छ अविरल बहती रहे, गंगाजल का महत्व सबको बताना होगा।

डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
स्वरचित
वैस्ट बंगाल 

पाकिस्तान में कितने हिन्दू? - खुशदीप सहगल

 पाकिस्तान में कितने हिन्दू? - खुशदीप सहगल


पाकिस्तान में कितने हिन्दू रहते हैं? पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने 14 अगस्त को अपने संबोधन में पाकिस्तान में हिन्दुओं की आबादी 3 से 4 फ़ीसदी बताई. इसे लेकर इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है...

हालांकि, पाकिस्तान सरकार की 2023 की आधिकारिक जनगणना के आंकड़े राष्ट्रपति के दावे को खारिज करते हैं. इसके अनुसार, पाकिस्तान में हिंदुओं की कुल आबादी लगभग 52 लाख है, जो देश की कुल जनसंख्या का केवल 2.17% ही है. जबकि पाकिस्तान हिन्दू पंचायत और हिन्दू काउंसिल कहती है कि ये संख्या क़रीब 80 लाख है... 

1947 में पाकिस्तान की आबादी में हिन्दुओं की हिस्सेदारी क़रीब 14.6% थी, जो 2023 की जनगणना के मुताबिक़ घटकर 2.17% रह गई... 

पाकिस्तान में 90 फ़ीसदी हिन्दू आबादी सिंध के 10 ज़िलों में रहती है. पंजाब में ढाई लाख, बलूचिस्तान में 60 हज़ार और ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में तक़रीबन 6 हज़ार हिन्दू आबादी बताई जाती है...

बंटवारे के दौरान और उसके तुरंत बाद करीब 47 लाख हिंदू और सिख पाकिस्तान छोड़कर भारत आ गए थे. साल 1951 में जब पाकिस्तान में पहली बार आधिकारिक जनगणना कराई गई, तो पश्चिमी पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी सिमटकर केवल 1.6 प्रतिशत (करीब 5.3 लाख) ही रह गई थी. इसके बाद दशकों तक यह आंकड़ा बेहद कम बना रहा. 1998 की जनगणना में भी हिंदुओं की आबादी 1.6 प्रतिशत दर्ज की गई थी. वर्तमान में अलग-अलग रिपोर्ट्स और हालिया गणना के मुताबिक, पाकिस्तान में हिंदुओं का प्रतिशत 1.6 से 2.17 फीसदी के आसपास बना हुआ है...

पाकिस्तान की पूरी आबादी में सिंध प्रांत का उमरकोट जिला एक अनोखा उदाहरण है. यह पाकिस्तान का एकमात्र ऐसा जिला है, जहां आज भी 52 प्रतिशत आबादी हिंदू है और वे बहुसंख्यक हैं. पूरे पाकिस्तान की बात करें तो देश में 96 से 97 प्रतिशत आबादी मुसलमानों की है, जिनकी संख्या करीब 24 करोड़ है. इनमें से 85 से 90 प्रतिशत सुन्नी और 10 से 15 प्रतिशत शिया मुसलमान हैं. वहीं, ईसाइयों की बात की जाए तो वे कुल आबादी का 1.37 से 1.5 प्रतिशत (लगभग 32 से 33 लाख) हैं, जो मुख्य रूप से पंजाब और सिंध प्रांत में बसे हैं...