Monday, 10 August 2026

जिन्दगी

जिन्दगी  : गोरक्ष जाधव

जिंदगी का फलसफा न समझ सका कोई...

कभी ढलान तो कभी चढ़ाव है ज़िंदगी,
कुछ ही दिनों का पड़ाव हैं जिंदगी,
अक्सर हम जीने  की कवायत में रहते है,
कभी मिलन तो कभी जुदाई है जिंदगी।

एक आँख में आँसू,एक आँख में हँसी हैं जिंदगी,
कभी खुशी तो कभी गम है जिंदगी,
एक सिक्के के दो पहलू है जीवन के,
कभी चित है तो कभी पट है जिंदगी।

कभी शक तो कभी यकीन है जिंदगी,
कभी शिकवा तो कभी खुशामद है जिंदगी,
प्रेम का वह खट्टा-मीठा स्वाद है जीवन का,
कभी बेरंग तो कभी उमंग है जिंदगी,

कभी आसान तो कभी कठिन है जिंदगी,
फूलों की ख्वाइश में काँटों पर चलना है जिंदगी,
ग्रीष्म की लू, तो कभी सुहानी पवन है,
कभी धूप तो कभी छाँव है जिंदगी।

कभी सजा तो कभी मजा है जिंदगी,
कभी सुनहरी सुबह तो कभी अतरंगी शाम है जिंदगी,
रेत-सी फिसलती है,अधूरी ख्वाइशें,
कभी तृष्णा तो कभी तृप्ति है जिंदगी।

लेकिन अपनों के साथ हसीन है जिंदगी ,
सपनों के साथ आसान है जिंदगी,
मौत से पहले जी लो हँसते-मुस्कुराते यारों,
बस इक बार ही इनायत करम है जिंदगी।

ज़िंदगी : एक अनवरत यात्रा

 ज़िंदगी : एक अनवरत यात्रा : Uzmataranum

ज़िंदगी केवल सांसों के चलने का नाम नहीं, बल्कि अनुभवों, संघर्षों, संबंधों और संवेदनाओं से निर्मित एक ऐसी यात्रा है, जिसका प्रत्येक पड़ाव हमें कुछ नया सिखाता है। मनुष्य जीवन में अनेक परिस्थितियों से गुजरता है—कभी सफलता उसका स्वागत करती है तो कभी असफलता उसे आत्ममंथन के लिए विवश करती है। वास्तव में, जीवन की सार्थकता इन्हीं विरोधाभासी अनुभवों के बीच स्वयं को पहचानने में निहित है।

आज का मनुष्य भौतिक उपलब्धियों की दौड़ में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उसके पास सुविधाएँ तो बढ़ी हैं, किंतु मानसिक शांति और आत्मसंतोष का अभाव दिखाई देता है। दूसरों की सफलता से अपने जीवन की तुलना करने की प्रवृत्ति ने व्यक्ति को अपनी उपलब्धियों का आनंद लेने से भी दूर कर दिया है। हमें यह समझना होगा कि प्रत्येक व्यक्ति की जीवन-यात्रा अलग होती है। किसी की गति को अपनी गति का मानक बनाना स्वयं के अस्तित्व के साथ अन्याय है।

ज़िंदगी का वास्तविक सौंदर्य छोटी-छोटी खुशियों को महसूस करने में है। परिवार का स्नेह, मित्रों का साथ, प्रकृति की सुंदरता, अपने कार्य के प्रति ईमानदारी और किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने की क्षमता—ये वे अनुभव हैं जो जीवन को भीतर से समृद्ध करते हैं। कठिनाइयाँ भी जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। वे हमें तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि हमारी आंतरिक शक्ति को पहचानने के लिए आती हैं।

समय जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक है। बीता हुआ कल हमारी स्मृति है और आने वाला कल हमारी कल्पना; हमारे पास वास्तव में केवल वर्तमान है। इसलिए वर्तमान को सार्थक बनाना ही जीवन की सबसे बड़ी समझदारी है।

अंततः ज़िंदगी किसी निश्चित मंज़िल का नाम नहीं, बल्कि निरंतर चलने, सीखने और स्वयं को बेहतर बनाने की प्रक्रिया है। जीवन की सफलता इस बात से नहीं आँकी जानी चाहिए कि हमने कितना पाया, बल्कि इससे कि हमने अपने जीवन को कितनी संवेदना, ईमानदारी और मानवीयता के साथ जिया।

हालातों से संघर्ष

हालातों से संघर्ष:डॉ वाई कस्तूरी बाई 

सीख यही जीवन का प्रथम और अंतिम विधान है—
जो कठिनाइयों से टकराता है, वही महान है।
हालात कभी किसी के अपने नहीं होते,
वे तो मनुष्य के धैर्य और साहस की परीक्षा लेते हैं।

ज़िंदगी फूलों की सेज नहीं,
यह काँटों से सजी हुई डगर है।
यहाँ हर कदम पर मुश्किलें बाँहें फैलाए खड़ी हैं,
पर जो मुस्कराकर उनसे लड़ता है,
विजय उसी के चरण चूमती है।

समय सबसे बड़ा गुरु है।
यह किसी के लिए रुकता नहीं, झुकता नहीं।
जो इसकी गति के साथ चलना सीख लेता है,
वह असंभव को भी संभव बना देता है।
जो आलस्य और भय में डूब जाता है,
समय उसे इतिहास के अंधकार में छोड़ देता है।

निराशा मनुष्य की सबसे बड़ी शत्रु है।
वह भीतर की ज्योति बुझाकर
आशाओं का आकाश अंधकारमय कर देती है।
किन्तु साहस का एक दीपक
हजारों निराशाओं पर भारी पड़ता है।

सफल वही होता है,
जो गिरकर भी उठना जानता है,
हारकर भी मुस्कराना जानता है,
आँधियों में भी अपने लक्ष्य की दिशा पहचानता है।
जिसके संकल्प पर्वत से अटल हों,
जिसका पुरुषार्थ सागर से गहरा हो,
उसे कोई बाधा रोक नहीं सकती।

कामयाबी कभी भाग्य की भेंट नहीं होती;
वह अथक परिश्रम, अटूट विश्वास,
अविचल धैर्य और निरंतर संघर्ष की संतान होती है।
इसलिए उठो, जागो, स्वयं को पहचानो।
हालात बदलने की प्रतीक्षा मत करो—
अपने साहस से हालात बदल दो।
समय तुम्हारी परीक्षा ले सकता है,
पर तुम्हारा आत्मबल यदि अडिग है,
तो एक दिन यही संसार तुम्हारे संघर्ष को प्रणाम करेगा,
और तुम्हारी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए
प्रेरणा का अमर दीप बन जाएगी।

Saturday, 8 August 2026

*"एक पेड़ मां के नाम" वृक्षारोपण अभियान पर पर्यावरणविद् डॉक्टर विनय कंसल ने किया वृक्षारोपण*

 *"एक पेड़ मां के नाम" वृक्षारोपण अभियान पर पर्यावरणविद् डॉक्टर विनय कंसल ने किया वृक्षारोपण*


*सारा सच (नई दिल्ली)* यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा मानसून के मौसम में देश की जनता से किए गए आवाह्न - *वृक्षारोपण केवल एक दायित्व नहीं बल्कि प्रकृति और संस्कारों का भी अभिन्न हिस्सा है* के अंतर्गत दिल्ली की मुख्य मंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी द्वारा दिल्ली की आम जनता से दिल्ली को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के लिए *मिशन 70 लाख पौधा रोपण अभियान* के अंतर्गत आज महर्षि दयानंद पार्क (नेपाल वाला बाग), कन्हैया नगर, त्रि नगर, दिल्ली में कन्हैया नगर आर डब्ल्यू ए ऑफ त्रि नगर (पंजीकृत), दिल्ली द्वारा एक विशाल वृक्षारोपण- *एक पेड़ मां के नाम* कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।

इस अवसर पर सर्वश्रेष्ठ तिलक राम गुप्ता (विधायक), श्रीमती मंजू संजय शर्मा (पूर्व निगम पार्षद), डॉ विनय कंसल (पर्यावरणविद्), अनिल बंसल (प्रधान अग्रवाल समाज त्रि नगर), संजीव दुबे (अध्यक्ष कन्हैया नगर आर डब्ल्यू ए ऑफ त्रि नगर) सहित त्रि नगर क्षेत्र की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं एवं संगठनों तथा विभिन्न आर डब्ल्यू ए के पदाधिकारी, स्कूल/ कॉलेज के विद्यार्थियों व अध्यापक-अध्यापिकाओं तथा डी डी ए के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा 251 पौधे मोगरा एवं चमेली के लगाए गए।

*मुझे (प्रकृति) ना सोना चाहिए, ना ही चांदी चाहिए ।*
*मुझे तो केवल आपसे एक पेड़ चाहिए।।*

Friday, 7 August 2026

शीर्षक-ज़िन्दगी

                                                                               ग़ज़ल

शीर्षक-ज़िन्दगी

 ज़िंदगी की राह भी आसान होती जायगी। 
जान मेरी आपके कुर्बान होती जायगी‌।। 

साथ मेरे दो कदम चल के जि देखो जानजाॅ, 
नींद ऑंखों से तिरी अनजान होती जायगी।। 

डूब कर ऑंखों मि तेरी तरवतर हो जायगी, 
सच कहूँ तो ज़िंदगी  मुस्कान होती जायगी।। 

क्या बताएं हम किसी को दिल्लगी क्या चीज़ है, 
आशिकों से तुम पूछो हैरान होती जायगी।। 

दिल कि धड़कन में बसाया है तुम्हें हमने "कमल"
दिल लगा कर देख लो पहचान होती जायगी।। 

स्वरचित मौलिक अधिकार रचना
कमल धमीजा
फरीदाबाद -हरियाणा

जिन्दगी