Friday, 30 January 2026

अटखेलियां करती पतंग - अनीता चमोली

 
अटखेलियां करती पतंग - अनीता चमोली उत्तराखंड (देहरादून)

सजा है आसमान नीली पीली
हरी गुलाबी पतंगांे से
और महक रहा है आज 
घर गुड़ तिल के
लड्डूओं की खुशबू से
मकर संक्रांति के इस 
त्योहार पर जैसे
न्यौता दिया हो सूरज को 
मुंह मीठा करने का 
एक साथ सभी ने
उत्सव मना रहा आसमान 
सुनहरी धूप की 
रूपहली छटा  में 
रंग रहा सभी को 
अपने रंग में और 
पंछियों की कलरव के साथ 
बहक रहा है जैसे
कि खिलते फूल बहकते लहकते 
मंद-मंद मस्त हवा में
लहराती बलखाती पतंगें जैसे 
ललचा रही हो किरणों को 
कहती हुई यही कि-
’आओ हमारे संग-संग 
तुम भी अटखेलियां करो!

गणतंत्र दिवस - संविधान - पदमा तिवारी दमोह

 

गणतंत्र दिवस - संविधान - पदमा तिवारी दमोह

आर्यावर्त है देश हमारा,
गणतंत्र दिवस मनाते हैं। 
करके नमन संविधान को, 
तिरंगा हम फहराते हैं।।

अनेकता में एकता, 
यही हमारी है पहचान। 
मिलजुल कर रहते सभी
भारत माता की है संतान।
देश हमें प्राणों से प्यारा,
इस पर जान गंवाते  हैं।।
करके नमन संविधान को, 
तिरंगा हम फहराते हैं।।

प्रेम के धागे में बांधे,
अपने देशवासियों को।
बढ़ करके हम हाथ मिलाते,
बच्चे बूढ़े और जवानों को।।
नहीं किसी से डरते हैं, 
आगे कदम बढ़ाते हैं।।
करके नमन संविधान को, 
तिरंगा हम फहराते हैं।।

अथक प्रयासों से हमने,
आजादी पाई थी। 
अनगिनत वीर शहीदों ने, 
अपनी जान गंवाई थी।।
वीर शहीदों की गाथाएं, 
हम इतिहासों में गाते हैं।।
करके नमन संविधान को 
तिरंगा हम फहराते हैं।।

न झुका है ना झुकने देंगे,
सिर गिरिराज हिमालयका।
प्यारा है ये वतन हमारा,
मिटाएंगे बीज नफरतों का।।
अमर रहे गणतंत्र हमारा, 
संदेश यही फैलाते हैं,
करके नमन संविधान को। 
तिरंगा हम फहराते हैं।।

@पदमा तिवारी दमोह मध्य प्रदेश

संविधान - गोरक्ष जाधव

संविधान - गोरक्ष जाधव 

संविधान निधान है राष्ट्र का
संविधान विधान है राष्ट्र का,
हर भारतीय का सन्मान है
संविधान प्रधान दंड है राष्ट्र का।

संविधान मंत्र है गणतंत्र का,
संविधान तंत्र है जनतंत्र  का,
देशभक्ति का अमूल्य प्रतीक है,
संविधान अभिमंत्र है प्रजातंत्र का।

संविधान चित्र है धर्मनिपेक्ष गणराज्य का,
संविधान सूत्र है देश के सुराज्य का,
हर हिंदुस्तानी का अभिमान है ये,
संविधान मित्र है हर हिंदुस्तानी का।

संविधान आधार है अनुशासन का,
संविधान व्यवहार है सुशासन का,
समता, बंधुता की राह आसान करे,
संविधान गुरुमंत्र है बाबासाहब का।

जय हिंद

गोरक्ष जाधव ©®
मंगळवेढा, महाराष्ट्र.

विमोचन पत्थर - भगवती सक्सेना गौड़

विमोचन पत्थर -  भगवती सक्सेना गौड़
अपनी कहानियों की पुस्तक "कलम की ताकत" का विमोचन के प्रोग्राम के बाद कोमल चतुर्वेदी घर वापस आ गयी थी। सम्मानित अतिथियों से वृहद रूप में आदर पाने के बाद मन बहुत प्रसन्न था। एकाएक विचार आया, कहाँ थी, कहाँ पहुँच गयी। और विचार उसे ले गए...एक परिवार में।
कोमल ने हिंदी साहित्य में एम.ए पास किया था, घर मे सब भाई बहन साइंस वाले ही थी। पापा ने जल्दी से कोमल के लिए संयुक्त परिवार में सरकारी नौकरी वाला लड़का देखा, और बिना कोमल की इच्छा जाने उसका विवाह कर दिया।
फिर बहू नामक पोस्ट की चौबीसों घंटे की नौकरी शुरू हो गयी, कभी कभी सबका प्यार बोनस के रूप में मिलता रहा।

पर उंसकी इच्छा हमेशा लिखने पढ़ने की होती, जिसका वो समय नहीं निकाल पाती, कोमल अपने नाम के अनुरूप न बन सकी तो वो पत्थर बन गयी, रोबोट बनकर ड्यूटी ही निभाती रहती।

उस पत्थर को कोई भी इधर उधर सरकाता रहा, सबकी इच्छा पूरी करने में कामयाब पत्थर था। उसके अंतर्निहित मन मे एक गठरी थी जिसमे संवेदनाये, भावनाये भरी थी।

घर मे सबको राह का रोड़ा प्रतीत होता था। क्योंकि उस पत्थर के नैनो में अंतर्ज्योति थी, गलत कार्य मे लाल होने की और खुशी में झर झर बहने की।

अचानक एक दिन उस पत्थर बनी कोमल के दिल के हालात समझकर उंसके बेटे ने कलम और डायरी का तोहफा दिया। और चुम्बकीय आकर्षण हुआ, पत्थर ने कलम को आलिंगन में लिया। उस कलम ने संवेदनाओं को झरने का रुप दे दिया। फिर तो कलम चल पड़ी, गति जेट से भी तेज थी, जीवन भर की गति विधियां जो सामाजिक भी थी, घरेलू भी थी, पन्नो में चित्रित हो गयी। बेटा ही माँ को पहचान सकता है, आज उसी बेटे ने माँ को लेखिका के रूप में प्रसिद्ध कर दिया था। विमोचन पुस्तक का करवा दिया।

और वो फिर से अपनी पुस्तक निहारने लगी।

स्वरचित
भगवती सक्सेना गौड़

देशभक्ति कविता - कंचनमाला ’अमर’ (उर्मी)

देशभक्ति कविता - कंचनमाला ’अमर’ (उर्मी)

शीर्षक_ये झंडा है प्यारा न्यारा

ये झंडा है प्यारा न्यारा
इसपर हमने दिल वारा है,
ये मातृभूमि आबाद रहे 
जन जन ने यही पुकारा है।

तिरंगा का अभिमान हमें
भारत की है ये शान कहें
ये आसमान में लहराए ,
जन जन को पुलकित कर जाए।

केसरिया रंग उन वीरों का
बलिदान किए जो निज जीवन का,
श्वेत रंग देता संदेश
है सत्य अहिंसा का यह देश।

हरा रंग खुशहाली का
भारत धरती है उपवन का,
इसकी हरियाली बनी रहे
इक यह संदेश भी झंडा का।

अशोक चक्र भी है इसमें 
इसका भी संदेश सुनो,
कहता है चलते रहने को
रुको न कभी गतिशील बनो।

झंडा अपना ये कहता है
कि आगे बढ़ मतभेद भुला ,
तुम सबका है कर्तव्य यही
हर राग द्वेष मनभेद भुला।

स्वरचित व मौलिक
कंचनमाला ’अमर’(उर्मी)✍️