Wednesday, 14 October 2026

स्वतंत्रता - डॉ. के. सुवर्णा

स्वतंत्रता - डॉ. के. सुवर्णा 

“स्वतंत्रता देश से नहीं मिलती, यह हमारी अपनी होती है। आइए, देश और समाज के सार्थक विकास के लिए हम सब मिलकर प्रयास करें, जिसके लिए स्वतंत्रता आवश्यक है।“


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डॉ. के. सुवर्णा

बैंगलोर 

स्वतंत्रता हर मनुष्य और देश का जन्मसिद्ध अधिकार है। यह वह अमूल्य उपहार है जिसने जनता को जीवन, स्वतंत्रता और समानता का अवसर दिया है। स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ अपने विचारों को अभिव्यक्त करना है, अपने विचार, कर्म और अधिकार का सही सम्मान के साथ उपयोग करना है।

मुक्त मन ही सच्चा अधिकार है। स्वतंत्रता हर व्यक्ति को जिम्मेदारी के साथ चाहिए। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी कहा है - "पराधीन सपनेहु सुख नाहीं"। अर्थात पराधीनता में मनुष्य को सच्चा सुख नहीं मिलता।

स्वतंत्रता हर मनुष्य का अनिवार्य अधिकार है। मनुष्य को मूलभूत रूप से बातचीत करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, अपने विचारों का समर्थन रखने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। स्वतंत्रता मनुष्य को अपनी भावनाओं का आदर करने, अपनी पहचान का सम्मान करने का अधिकार देती है। स्वतंत्रता एक ऐसा अधिकार है जो मनुष्य को अपनी समस्याओं का समाधान करने में मदद करती है।

स्वतंत्रता अपने आप को अभिव्यक्त करती है, खुलकर जीने का अवसर देती है। स्वतंत्रता मनुष्य को आजाद करती है। स्वतंत्रता क्या होती है, यह एक देश के झंडे से पता चलता है। स्वतंत्रता क्या होती है, यह सूरज के उगने से पता चलता है।

यदि हम अपनी क्षमता का सही उपयोग करें तो मनुष्य सुख पाता है। आज भी जाने कितने लोग हर कदम पर युवा पीढ़ी से अपेक्षा रखते हैं कि वे स्वतंत्रता के साथ अपने मन और समाज के साथ रहकर स्वतंत्रता शब्द के वास्तविक अर्थ को समझें।

कहा गया है, "भारत देश के एक-एक नागरिक युवा पीढ़ी को सही मायने में स्वतंत्रता का समझना है। स्वतंत्रता की लगाम अपने हाथ में होनी चाहिए। युवा पीढ़ी आज ऐसा युवा वर्ग है जो अपने आइडल बनाकर चल रहे हैं। आज हमें अपने आदर्श को समझना है। स्वतंत्रता का एक उदाहरण आधुनिक काल में हमारे आधुनिकीकरण तक राजा का उदाहरण ले सकते हैं। उनकी स्वतंत्रता से समाज और तंत्र मजबूत तक फैला है। यह बस स्वतंत्रता ही प्रतिबिंब नहीं है, अपने हर कदम पर करते हुए स्वतंत्रता शब्द की सच्चाई को साकार करना ही है। स्वतंत्रता ही हर देश की पहचान है, आने वाली पीढ़ी को विरासत है।“



सारांश:

इस पैरा में लिखा है कि स्वतंत्रता का सही मतलब समझना जरूरी है। युवा पीढ़ी को अपने आदर्श चुनकर जिम्मेदारी के साथ स्वतंत्रता का उपयोग करना चाहिए। स्वतंत्रता सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि हर काम में उसकी सच्चाई को जीना है। स्वतंत्रता ही देश की पहचान है और यह आने वाली पीढ़ी की विरासत है।

Sunday, 11 October 2026

सेवा - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'

सेवा - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी' 

सेवा करो मेवा मिलेगा,  बचपन से सुनते आए हैं। भारतीय सेवा का आदर्श वाक्य 'सेवा परमो धर्म:' ,'सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है'
हमारे बुजुर्ग हमें बताएँ हैं।
सेवा करो सबकी, जितना तुमसे संभव हो।
आशीष पाओ सबका, प्रगति तुम्हारी निरंतर हो।
सेवा जब भी किसी की करना, रहे
नि: स्वार्थ भाव।
सद्मार्ग पर सदा चलना, करना सबसे अच्छा बर्ताव।
त्रेता युग में सेवा की हनुमान जी ने प्रभु राम की,
सीता की खबर विभु को सुनाई।
संजीवनी बूटी लाकर, लक्ष्मण जी की जान बचाई।
सीना चीरकर प्रभु राम और माता सीता की छवि अपने दिल में दिखलाया।
माता सीता से अष्ट सिद्धि नव निधि का, दाता होने का वरदान पाया।
सेवा किया श्रवण कुमार ने, अंधे माता-पिता को कांवर पर बिठा, 
चारों धाम कराने का ठान लिया।
सेवा किया लक्ष्मण जी ने प्रभु राम का, 
चौदह वर्ष तक नींद का त्याग किया।
आगे-आगे चलकर लक्ष्मण जी रास्ते का कांटा-पत्थर साफ किये, हर पल प्रभु के साथ रहे।
सेवा किया गणेश जी ने, माता-पिता को ब्रह्मांड मान
उनकी ही परिक्रमा किये।
सेवा क्या है, ऋषि पुंडरीक ने बताया।
माता-पिता के चरण दबाने में लीन, प्रभु कृष्ण को भी इंतजार कराया। 
सेवा, समर्पण का भाव क्या होता है, भक्त आरुणि हमे़
बता गए।
मेढ़ से पानी रोकने हेतु, खुद ही लेट गये।
शिष्य से प्रसन्न हो, गुरु धौम्य ने आशीर्वाद दिए। 
भक्त आरुणि 'उद्दालक' नाम से विख्यात हुए‌।
शिष्य उपमन्यु ने, निष्ठा से गुरु की सेवा की।
भूख और तकलीफ 
से हार न मानी, 
दिव्य ज्ञान प्राप्त की।
सेवा करना तो कभी भी, अभिमान मत करना।
लालच से दूर रह, सच्चे मन से सेवा करना।
दूसरों को ईश्वर का अंश मानो, उनकी सेवा करो।
किसी को कोई हानि न पहुंचे, इसका ध्यान सदा धरो‌।
'ते प्राप्नुवन्ति मामेव सर्वभूतहिते रता:'
भगवान श्री कृष्ण ने बताया।
सेवा करने वालों को ईश्वर का अशीष मिलता, यही हमें सबने समझाया।
तन से सेवा, मन से सेवा, धन से सेवा,
जो भी बन पड़े करो।
किसी के मन के भाव को समझो, बिना कहे उसकी जरूरत पूरी करो।
सीमा पर हमारे सैनिक, देश की सेवा करते हैं। 
उनके कारण हम आज, शांति से घर में रहते हैं। 
औरों की सेवा करने से, अपना मनोबल बढ़ता है।
हृदय में करुणा उत्पन्न होती, मन को शांति मिलती, आत्मिक आनंद मिलता है।

डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी' 
स्वरचित
वैस्ट बंगाल 

सत्य - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त

अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारीवाणी साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु 

सत्य - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर 
कविता...   सत्य

सत्य और सच्चाई की
राह पर चलना मुश्किल है ।
साहस का तो काम यही है
जो बहुत ही कठिन होता है ।

झूठ फरेब तो आज का दौर है
बस कदम कदम पर धोखे है।
सत्य का साथ कोई न देता
पल पल आते ऐसे मौके है ।

स्वार्थ  की इस दुनिया में भी
कुछ अच्छे लोग भी मिलते है ।
सत्य का साथ साहस से करते
सत्य की दम पर ही वो जीते है ।

सत्य की राह जो चलता है
राह बहुत वो कठिन होती है ।
साहस से मंजिल पाना ही
सत्य की वो मिशाल होती है ।

ठोकर खाकर मंजिल पाना
गिरना उठना और संभलना ।
सत्य की राह ,यही होती है
कदम कदम पर साहस रखना ।

सुख दुख चाहे जो भी आये
हिम्मत और साहस न छोड़ना
जीवन में कदम कदम पर ही
सत्य का साथ हमेशा ही देना ।

सुख दुख जीवन में आते जाते
जो समय के साथ बदलते हैं ।
संघर्ष मयी ये जीवन होता है
सत्य का साथ कठिन होता है ।

जीवन और मृत्यु
एक अटल सत्य है
अपने समय पर होती है ।
यही तो मृत्यु का सत्य है ।

विधि का विधान
क्या है कौन जानता है ।
कब क्या हो जाए
किसको पता है ।

नियति कभी हंसाती है
तो कभी रुलाती भी है ।
नियति की गति अपने
समय पर ही चलती है ।

बस समय से ही चलती है।
इन्सानों द्वारा किये कार्य 
में कोई गलती हो जाय 
कही कोई हादसा हो जाय ।

उसमें मीडिया बाले और
तमाम लोग हो हल्ला करते हैं।
एक दूसरे पर अपना पल्ला
झाड़ कर दोषारोपण करते है ।

अपना मतलब सिद्ध करने
जले पर नमक छिड़कते है ।
होनी अपने समय पर होनी है 
उसको कोई टाल नही सकते है।

गीता के ज्ञान को सभी जानते है
कथा भागवत में सुनते गुनते है ।
सुख दुख तो आते जाते हैं
पर दुख आने पर घबरा जाते हैं ।

रावण तो परम ज्ञानी अधर्मी था
अहंकारी पापी अहम में भूला था ।
पाप का घड़ा जब भर गया 
तब अंत में मारा भी गया था ।

अपने साथ सभी पापियों को
काल के मुंह का ग्रास बनाया
विधी का विधान समय पर हुआ ।
उससे कोई नही बच पाया ।

कुछ हादसे दुर्घटनाएं विधी 
द्वारा ही निर्धारित होती है।
कितना भी उपाय कर लो
सत्य बात समय पर होती है ।

  महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त 
     जबलपुर म प्र 

स्वदेशी - डॉ रूपाली दिलीप चौधरी

स्वदेशी - डॉ रूपाली  दिलीप चौधरी 

स्वदेशी मेरे लिए केवल देश में बनी वस्तुओं को खरीदना नहीं है, बल्कि अपने देश और अपने लोगों के प्रति जिम्मेदारी की भावना है। जब मैं किसी स्थानीय कारीगर से बनी वस्तु खरीदती हूँ, तो मुझे लगता है कि मेरे छोटे-से निर्णय से किसी परिवार के घर का चूल्हा जल सकता है। किसी किसान, बुनकर, हस्तशिल्पी या छोटे व्यापारी की मेहनत को सम्मान मिल सकता है।

आज हम आधुनिकता और वैश्वीकरण के दौर में जी रहे हैं। बाजार में देश-विदेश की अनेक वस्तुएँ उपलब्ध हैं। ऐसे समय में स्वदेशी का अर्थ यह नहीं कि हम दुनिया से कट जाएँ, बल्कि यह है कि हम अपने देश में बनी अच्छी और गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं को प्राथमिकता दें। इससे हमारे स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

महात्मा गांधी ने स्वदेशी को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा था। उनके लिए स्वदेशी आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक था। आज भी उनका यह विचार हमें प्रेरणा देता है।

मेरा मानना है कि देशप्रेम केवल नारों में नहीं, बल्कि हमारे रोजमर्रा के छोटे-छोटे निर्णयों में दिखाई देना चाहिए। यदि हम अपनी जरूरतों में स्वदेशी को स्थान दें और अपने देश के श्रम, प्रतिभा और संसाधनों पर विश्वास करें, तो यही हमारी सच्ची देशभक्ति होगी। स्वदेशी अपनाना अर्थात अपने देश की मिट्टी, मेहनत और मनुष्य पर विश्वास करना।

  डॉ रूपाली  दिलीप चौधरी 
   Maharashtra 

वापू गाँधी और शास्त्री - वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ

वापू गाँधी और शास्त्री - वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ
                     *****
 हैं ये देश के  दो सच्चे सपूत 
 इनके कर्म कभी नहीं भूलेंगे 
                 जब तक रहेगी धरती माता
                 याद  हमें  हर  वर्ष  आयेंगे

 बापू गांधी का है नाम उजागर
 शास्त्री देश के प्रधानमंत्री बने 
        बापू  का  जन्म 2 अक्टूबर 1869
        शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904

अमर हो गए गांधीजी और शास्त्री जी
इनकी त्याग और  तपस्या अमूल्य थी
     बापू, शास्त्री की पत्नी थी बहुत महान
  कस्तूरबा व ललिता देवी जानी जाती थी

 महात्मा गांधी  विश्व में पूजे जाते हैं 
 देश दुनिया में महान समझे जाते हैं 
           2 अक्टूबर को याद किये जाते हैं
          यही हमें समझ में आते -  जाते हैं

 यही है हमारी देश की बड़ी ताकत
 जिसके चलते भारत हुआ बलवान
                  भारत अब विश्व गुरु बनेगा 
                  देश का होगा अब कल्याण 

 कहते हैं " वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ "
 बहुत  कष्ट  झेले थे शास्त्री जी ने
          अब  घबराने  की  जरूरत है नहीं
          रहस्य समझा दिया था गाँधीजी ने
              —--  धन्यवाद  —--

 रचयिता - वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ
       कोशी शिविर बथनाहा अररिया
            बिहार