Tuesday, 3 November 2026

कुल्हाड़ी में लकड़ी हमारी पिरोई हुई है - डाॅ० योगेश सिंह धाकरे "चातक"

कुल्हाड़ी में लकड़ी हमारी पिरोई हुई है - डाॅ० योगेश सिंह धाकरे "चातक"
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पर्यावरण की रक्षा तो,
तेरा धर्म होना चाहिये ।
शत्रु कोई भी हो.....तेरा
तरू तो मित्र होना चाहिये ।

जीवनदाता है सभ्यतायों के,
इनके संरक्षण पर सवाल है ।
यें ही प्राण वायु के दाता हैं,
अस्तित्व पर ही तलवार है ।

प्राणवायु भी इनकी..
बिना मूल्य की दी हुई है ।
किन्तु कुल्हाड़ी मे लकड़ी,
हमारी  ही पिरोई हुई है ।

हमारी साँसे जो चल रही है..
इनका ही तो उपकार है ।
प्राणवायु सहित अन्न से ही
जीवित समूचा संसार है ।

विनाश करा है वसुधा का..
जल थल नभ दुषित कर ।
बस दोहन कर पाया है तू
धरा  को  प्रदूषित  कर ।

तेरी चाहतों का अन्त नही, 
तुने किसी को नही छोड़ा है ।
प्रकृति हमारी शुभचिंतक थी,
हर मिथक को इसने तोड़ा है ।

करोना में कृत्रिम हवा के लिये,
कितनी व्यापक मारा मारी थी !
उन्होंने भी बहुत सिर पीटे थें..
जिनकी जेंबे अथाह भारी थी !!

एक पेड़ से जलाया जाता है.
तुझे मोक्ष की प्राप्ति के लिये !
मोक्षदाता को क्या दे पाता है..
तू मोक्ष के परिपेक्ष के लिये !!

मोक्ष पाता है प्राणवायु पाता है
रे मानव फिर भी नही अघाता है
हर तरह से, दोहन कर लेता है
पर तू,प्यार क्यों नही दें पाता है

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रचयिता....
डाॅ० योगेश सिंह धाकरे "चातक"
{ओज कवि} अलिराजपुर  म. प्र
@ सर्वाधिकार सुरक्षित...©®
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सुरक्षा - संजय वर्मा "दृष्टि "

सुरक्षा - संजय वर्मा "दृष्टि "

डरी -डरी सी दहशत से भरी जिन्दगी
पग -पग पर  भय से भरी जिन्दगी
मुड -मुड सी पलट से  भरी जिन्दगी
सूनी राहों पर दबोची जा रही जिन्दगी।

हैवानियत  से सनी जा रही जिन्दगी
हर चौराहों पर अब चीख रही जिन्दगी
चीखों को रोकों जरा, हैरान है जिन्दगी
दुष्कर्मियों पर कसों फंदा रो रही जिन्दगी।

रेप पीड़ित की सिसकती रही जिन्दगी
सुरक्षा की मदद सबसे मांग रही जिन्दगी
कलयुग भी हैरान देख ये दुःख भरी जिन्दगी
गुहार किससे करे ढूंढ़ रही आंसू भरी जिन्दगी।

स्तब्ध है सारी दुनिया देख लाचार भरी जिन्दगी
बेटियों की ये दशा कहा गई सुरक्षा भरी जिन्दगी

फांसी की सजा मिले ये इंतजार कर रही जिन्दगी

बिना भय के रहे लड़कियां ,दुआ मांग रही जिंदगी। 

संजय वर्मा "दृष्टि 

Monday, 2 November 2026

पर्यावरण - सौरभ पाण्डेय 'आशु

पर्यावरण - सौरभ पाण्डेय 'आशु 

पर्यावरण अर्थात हमारे चारों ओर का आवरण चारों दिशाओं में यह आवरण छाया हुआ हैl आज से कई साल पहले बात की जाए तो शायद हमारा पर्यावरण सुरक्षित है, आज वह धीरे-धीरे सुरक्षा खत्म होती जा रही क्योंकि हम इसे सुरक्षा दे ही नहीं पा रहे हैं हमारे पास समय ही नहीं क्योंकि हम अपने जीवन शैली में इतने व्यस्त हो चुके हैं कि हम भूल चुके हैं, यह पेड़ पौधे यह पहाड़ यह नदियां आज असुरक्षा की धीरे-धीरे अग्रेसर  होती जा रही है यह कोई बताने वाली चीज नहीं है यह हमारे चारों तरफ विद्यमान है दूसरी बात सरकार का ही काम नहीं हमारी भी कोई जिम्मेदारी बनती है क्यों हम भूलते जा रहे हैं यही हमारा जीवन है जब तक उनकी सुरक्षा का दायित्व नहीं लेंगे तो हम जीवन पर्यंत असुरक्षा ही महसूस करेंगे  l                                                                          

प्रत्येक व्यक्ति को इसके लिए भी समय निकालना पड़ेगा अपने साथ-साथ लोगों को भी जागरूक करना पड़ेगा इसका एक निस्तारण  यही है ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाए नदियों को गंदा ना करें,आसपास के जानवरों को सुरक्षा दें प्लास्टिक का काम से कम क्योंकि जिस दिन इनका संतुलन गड़बड़ा हुआ उसे दिन ग्लोबल वार्मिंग तो बढ़ेगी धीरे-धीरे कई आपदाओं को भी लेकर आएगी हमें पता है प्राकृतिक आपदा कोई झेल नहीं सकता है और आने पर से कोई रोक नहीं सकता यह भी हमारी दिनचर्या का एक अभिन्न अंग है कब तक इसे भागते रहेंगे आने वाली नई पीढ़ियां को यह बात जरूर सिखाएं पाठ पुस्तक में से पढ़कर छोड़ ना दे उसे अपने जीवन शैली में अपनाये क्योंकि हमारे आसपास की प्राकृतिक हैं तो हम हैं यह हमारे जीवन का एक विचार बिंदु है क्योंकि इन्हीं से हमारी सुबह है और इन्हीं से हमारी शाम l


सौरभ पाण्डेय 'आशु 
'सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश

प्लास्टिक उपयोग बंद करें - गंगा शरण पासी

प्लास्टिक उपयोग बंद करें - गंगा शरण पासी 

पर्यावरण को बचाने के लिए प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना आज के समय की सबसे बड़ी जरुरत बन चुका है। प्लास्टिक एक ऐसा गैर बायोडिग्रेडेबल पदार्थ हैं,जिसे पूरी तरह से मिट्टी में मिलने में सैकड़ों साल लग जाते हैं। वर्तमान में इसका अंधाधुंध इस्तेमाल हमारे पूरे ईकोसिस्टम के लिए एक गम्भीर खतरा बन गया है। क्योंकि इससे मिट्टी की बर्बादी,जल प्रदूषण व समुद्री जीवन के लिए खतरा बढ़ते ही जा रहा है। पानी ही जीवन है,पानी जब अशुद्ध हो जायेंगी तो मानव का जीवन भी खत्म हो जायेगा, इसलिए हमें आज ही पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान देना हैं। और हर खाली जगहों पर पेड़ पौधे लगाने हैं,तथा प्लास्टिक का उपयोग बंद करवानें है।आज हम पर्यावरण का संरक्षण करने के लिए वचन लेना चाहिए। क्यों कि यह हमारे जीवन को खत्म कर देंगी,पानी, भोजन जब अशुद्ध हो जायेगा तो हम सबका जीवन ख़तरे में पड़ जायेगा।
लेखिका डा गंगा शरण पासी छत्तीसगढ़ राज्य से

गंगा शरण पासी 
छत्तीसगढ़

मानव और पर्यावरण संरक्षण " - नाम - एम. एल. नत्थानी

मानव और पर्यावरण संरक्षण " - नाम - एम. एल. नत्थानी

" अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच "
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 ( मेरी कलम मेरी पहचान )
सत्र :- 353
प्रतियोगिता का विषय -
 ( पर्यावरण, भविष्य, सिंगलयूज प्लास्टिक, प्रतिबंध, भागीदारी, संरक्षण, जिम्मेदारी, सुरक्षा )
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विधा - पद्य ( कविता )
कविता का शीर्षक -

" मानव और पर्यावरण संरक्षण " - नाम - एम. एल. नत्थानी
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आधुनिक जीवनशैली में 
मानव ने सुख चैन खोया 
प्रकृति से खिलवाड़ कर 
पर्यावरण संरक्षण खोया 

जिंदगी के हिसाबों जैसी 
ऋतुएं हिसाब करती है 
पर्यावरण असुंतलन से ही 
प्रकृति खराब करती है 

भूगर्भ की कोख में लावा 
सदा ही प्रवाहित होता है 
पर्यावरण का असंतुलन 
जैसा ही कदाचित होता है 

भूस्खलन और हिमपात से 
प्राकृतिक आपदा होती है 
संसाधनों के दोहन से ही 
मानव पर विपदा होती है 

कभी मैदानी भूभागों पर 
प्रचंड गर्मी तो बरसती है 
लेकिन बर्फीले पहाड़ों पर 
सर्द हवाएं तो मचलती है 

ऋतुओं का लेखा-जोखा 
मनुष्य का बही - खाता है 
कर्म बीज की खाद जैसी 
पर्यावरण का फल पाता है

धरती मां की अश्रु धारा को 
मानव समझ नहीं पाया है 
शायद खुद दुख सहकर भी 
प्रकृति संरक्षण को निभाया है 

पद्य ( कविता ) के रचनाकार का विवरण -
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नाम - एम. एल. नत्थानी