जिन्दगी : गोरक्ष जाधव
जिंदगी का फलसफा न समझ सका कोई...
कभी ढलान तो कभी चढ़ाव है ज़िंदगी,
कुछ ही दिनों का पड़ाव हैं जिंदगी,
अक्सर हम जीने की कवायत में रहते है,
कभी मिलन तो कभी जुदाई है जिंदगी।
एक आँख में आँसू,एक आँख में हँसी हैं जिंदगी,
कभी खुशी तो कभी गम है जिंदगी,
एक सिक्के के दो पहलू है जीवन के,
कभी चित है तो कभी पट है जिंदगी।
कभी शक तो कभी यकीन है जिंदगी,
कभी शिकवा तो कभी खुशामद है जिंदगी,
प्रेम का वह खट्टा-मीठा स्वाद है जीवन का,
कभी बेरंग तो कभी उमंग है जिंदगी,
कभी आसान तो कभी कठिन है जिंदगी,
फूलों की ख्वाइश में काँटों पर चलना है जिंदगी,
ग्रीष्म की लू, तो कभी सुहानी पवन है,
कभी धूप तो कभी छाँव है जिंदगी।
कभी सजा तो कभी मजा है जिंदगी,
कभी सुनहरी सुबह तो कभी अतरंगी शाम है जिंदगी,
रेत-सी फिसलती है,अधूरी ख्वाइशें,
कभी तृष्णा तो कभी तृप्ति है जिंदगी।
लेकिन अपनों के साथ हसीन है जिंदगी ,
सपनों के साथ आसान है जिंदगी,
मौत से पहले जी लो हँसते-मुस्कुराते यारों,
बस इक बार ही इनायत करम है जिंदगी।




