Wednesday, 12 August 2026

अमन नाम है मेरा...अमन चोपड़ा / खुशदीप सहगल



अमन नाम है मेरा...अमन चोपड़ा / खुशदीप सहगल

कुछ पत्रकार जो विरोध के डर से 15 किलोमीटर दूर जंतर-मंतर पर घुसने की हिम्मत नहीं कर सके, वो 1,200 किलोमीटर दूर रांची में रौला-रप्पा मचाए हुए हैं. ऐसे ही एक पत्रकार का नाम है अमन  चोपड़ा. ये जनाब एंकर तो न्यूज़ 18 के हैं लेकिन इन दिनों TAP (द अमन पॉडकास्ट) नाम से अपना यूट्यूब चैनल भी चला रहे हैं. रांची में ये सारी धमाचौकड़ी TAP के नाम पर ही मचा रहे हैं. अब पता नहीं न्यूज़ 18 चैनल ने इन्हें सेवामुक्त कर दिया है या नहीं? चैनल में काम करते अमूमन इस तरह ख़ुद के प्लेटफॉर्म पर काम करने की इजाज़त नहीं होती...

अमन चोपड़ा ने TAP शुरू किया तो पहले पॉडकास्ट में ही कंट्रोवर्सी क्रिएट करने के लिए शंकाराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से भिड़ंत कर डाली. उनके लिए 'अविमुक्तेश्वरूद्दीन' शब्द का इस्तेमाल किया...

रांची में छात्रों को बांटने वाला खेल शुरू किया तो एक स्थानीय नागरिक ने अमन चोपड़ा को जमकर लताड़ लगाई. अमन चोपड़ा ने छात्रों को आदिवासी और ग़ैर आदिवासी में बांटने का कुत्सित प्रयास किया तो उस शख़्स ने डांटते हुए कहा, छात्र छात्र होता है ये बांटने का गंदा खेल मत खेलो...

अमन चोपड़ा ने आईसीयू में घुस कर सारे प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ा कर एक मरीज़ के बेड से रिपोर्टिंग की. कैमरामैन को भी साथ ले रखा था. जिस मरीज़ छात्र की बुरी हालत बताई, उसी के बेड पर बैठ मुंह में माइक घुसाकर इन्टरव्यू की कोशिश की. न मुंह पर मास्क. आईसीयू में तमाम एहतियात बरतने के बाद मरीज़ के किसी रिश्तेदार को भी बहुत संक्षिप्त समय के लिए अनुमति होती है. अमन चोपड़ा ने मरीज़ के चेहरे को हाथ भी लगाया. इससे मरीज़ को इंफेक्शन हो जाता तो कौन जवाब देता? अमन चोपड़ा की इस हरकत ने अस्पताल के प्रभारी को एफ़आईआर दर्ज कराने पर मजबूर किया... 

झारखंड पुलिस जब अमन चोपड़ा को पूछताछ के लिए ले जाने पहुंची तो जनाब आलीशान रेस्टोरेंट में नाश्ता कर रहे थे. नाश्ते की टेबल भरी हुई थी. कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने तंज किया- कितना खाता है भाई? एक यूज़र ने नाश्ते की एक प्लेट में अंडा बताते हुए कहा- सावन में भी अंडे से गुरेज़ नहीं...

हद तो ये कि सोशल मीडिया पर कुछ कथित पत्रकार अमन चोपड़ा का समर्थन कर रहे हैं. जिन चैनलों में अमन चोपड़ा ने काम किया, उन्हें इसके ज़हरीले बोलों की वजह से टीवी समाचार प्रचारकों की निजी स्व-नियामक संस्था न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBDSA) की ओर से कई बार जुर्माने का भी सामना करना पड़ा है...

न्यूज़ 18 में रहते एंकर अमन चोपड़ा के पांच प्रसारणों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी. इनमें से तीन पर NBDSA ने जुर्माना लगाया, वहीं दो पर जुर्माना तो नहीं लगा, लेकिन चैनल को चेतावनी देते हुए शो से जुड़े सभी वीडियो को हटाने का निर्देश दिया गया...

एंकर अमन चोपड़ा की मेजबानी वाले ‘देश नहीं झुकने दूंगा’ कार्यक्रम के पांच एपिसोड को लेकर NBDSA में शिकायत की गई थी... 

गुजरात के खेड़ा में गरबा कार्यक्रम में पत्थर फेंकने के आरोप में गुजरात पुलिस द्वारा कुछ युवकों की पिटाई दिखाता हुआ एक वीडियो अक्टूबर महीने में वायरल हुआ था. इस वीडियो पर न्यूज़18 के एंकर अमन चोपड़ा ने ‘देश नहीं झुकने दूंगा’ शो किया.इस शो में एंकर ने खंभे से बांधकर पीटे जा रहे युवकों को लेकर कहा कि गुजरात पुलिस इनके साथ गरबा खेल रही है. कार्यक्रम में मुस्लिम युवकों के गरबा कार्यक्रम में जाने पर ही सवाल खड़ा कर दिया गया, और एंकर ने शो में सांप्रदायिक रंग दिया.इस शो के खिलाफ इंद्रजीत घोरपडे और सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी), दोनों ने अक्टूबर 2022 में NBDSA में शिकायत दर्ज की..
NBDSA ने इस मामले में सुनवाई करते हुए चैनल पर 25 हजार का जुर्माना लगाया है. साथ ही सभी प्लेटफॉर्म्स से वीडियो को हटाने का निर्देश भी दिया...

न्यूज़18 पर प्रसारित दूसरा कार्यक्रम योगी आदित्यनाथ के ’80 बनाम 20′ वाले बयान से संबंधित था. इस कार्यक्रम में कहा गया कि हिन्दुओं के खिलाफ उत्तर प्रदेश में महागठबंधन तैयार हो गया है और जब योगी आदित्यनाथ ने 80 बनाम 20 की बात की, तो वो सही था. इस प्रसारण के दौरान एंकर ने निष्पक्षता की दहलीज पार कर दी थी. उपरोक्त उल्लंघनों को देखते हुए NBDSA ने चेतावनी जारी करने का निर्णय लिया और प्रसारक को भविष्य में और ज़्यादा सावधानी बरतने के लिए कहा, साथ ही 50,000 रुपये का जुर्माना लगाने का फैसला किया. NBDSA ने पाया कि न्यूज़18 इंडिया पर दिनांक 18 जनवरी 2022 को प्रसारित “देश नहीं झुकने देंगे – हिंदुओं के खिलाफ” शीर्षक वाले कार्यक्रम ने आचार संहिता का उल्लंघन किया था....

तीसरा शो ‘देश नहीं झुकने देंगें’ 5 अगस्त 2022 को शाम 7:57 बजे ‘गज़वा-ए-हिंद’ शीर्षक से प्रसारित हुआ. इसमें भी संस्थान ने पाया कि ये कार्यक्रम एक पूरे समुदाय को बदनाम करने पर ज़ोर दे रहा था, जिसका स्लोगन था ‘बॉर्डर पे भाई जान, खतरनाक है प्लान.’ उपरोक्त कार्यक्रमों की मंशा को ध्यान में रखते हुए NBDSA ने ब्रॉडकास्टर पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाने का फैसला किया. NBDSA ने प्रसारक को उक्त वीडियो को हटाने का भी निर्देश दिया.

चौथा व पांचवा कार्यक्रम, जो 29 सितंबर 2022 और 28 सितंबर 2022 को प्रसारित हुआ था, उसमें भी एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया गया था. इसी को देखते हुए NBDSA ने दोनों कार्यक्रमों के वीडियो को हटाने का निर्देश दिया है...

इस शख़्स का नाम माता पिता ने न जाने क्यों 'अमन' रखा जबकि पत्रकारिता ये बांटने और भड़काने वाली करता है...इसे तो अपने शो की शुरुआत भी प्रेम चोपड़ा स्टाइल में करनी चाहिए-

"अमन नाम है मेरा...अमन चोपड़ा"...

Tuesday, 11 August 2026

जागो विद्यार्थी जागो

शीर्षक : जागो विद्यार्थी जागो : डॉ. वै . कस्तूरी बाई 

पक्ष खड़ा है अपनी धुन में, विपक्ष अलग हुंकार करे,
 जनता रोती बीच सड़क पर, कौन यहाँ उद्धार करे?
बेशर्म चेहरों की मुस्कानों में, झूठ का मेला सजता है,
 नालायक नेतृत्व के कारण, हर सपना चुपचाप मरता है।
ज़िद्दी अहं का शोर मचा है, घमंड गगन को छूता है,
 दादागिरी की भाषा सुनकर, संविधान भी रूठा है।
झुकना यदि हो सत्य के आगे, वह तो उत्तम आचरण है,
 पर स्वार्थों के आगे झुक जाना, राष्ट्रधर्म का मरण है।
भ्रष्ट हवाएँ बहती देखो, आरोपों का जाल बिछा,
 ग़ैर क़ानूनी चालों ने फिर, न्यायालय का द्वार खटखटा।
विद्यार्थी सब देख रहे हैं, कैसी चलती राजनीति,
 जैसा बोओगे वैसा काटो, यही समय की है नीति।
जब विद्यालय से अधिक उन्हें, नारे ही आकर्षित करते,
 ज्ञानदीप फिर मंद पड़ेंगे, सपने सारे धूल बिखरते।
हड़तालों का शोर सिखाकर, यदि श्रम का मूल्य भुलाओगे,
 अनशन को ही शक्ति बताकर, कर्मपथ कहाँ दिखलाओगे?
विदेशी हित यदि राजमुकुट का, गुप्त अभिलाषा बन जाए,
 लोभ-लालच की रिश्वत पाकर, नीति कठपुतली बन जाए।
जो अपने ही देश की नैया, स्वार्थों से डुबवाते हैं,
 इतिहासों के कठोर पृष्ठ पर, वे अपराधी कहलाते हैं।
युवकों! तुम विवेक जगाना, क्रोध नहीं, निर्माण चुनो,
 सत्य, श्रम, विज्ञान, सदाचार का, उज्ज्वल पावन मार्ग चुनो।
लोकतंत्र की शक्ति यही है— मतभेद रहें, मनभेद नहीं;
 राष्ट्र प्रथम हो, दल बाद में हों, इससे बढ़कर संदेश नहीं।
आओ मिलकर प्रण दोहराएँ— देश न बिकने पाएगा,
 ईमानों का दीप जलाकर, भारत आगे जाएगा।

पक्ष–विपक्ष का खेल

कविता : "पक्ष–विपक्ष का खेल" : डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "

पक्ष कहे — "मैं दूध का धुला हूँ," विपक्ष बोले — "तू ही तो खुला हूँ!" दोनों की बातें सुन जनता हँसती, सच की नाव बीच भँवर में फँसती।
आरोपों की बरसात निराली, हर जुबाँ पर अपनी ही लाली। भ्रष्ट कहे वो उसको हरदम, खुद के दामन पर चुप है मातम।
बेशर्मी का ऐसा मेला, झूठ बना है सबसे चेला। नालायक का तमगा बाँटें, अपने दोष कभी न आँकें।
जिद्दी मन और दंभ का झंडा, बन गया राजनीति का धंधा। दादागिरी का ऐसा रंग, जनता रह जाए दंग-ही-दंग।
झुकना जिनको हार लगे है, अहंकार ही ताज जड़े है। संवादों के टूटे धागे, रिश्ते सारे पड़े अभागे।
गैरकानूनी चालें चलकर, फिर भी भाषण दें सँभलकर। सच की बातें कम ही होतीं, वादों की बस फसलें बोतीं।
जनता अब सब भाँप रही है, चुप रहकर भी नाप रही है। जिस दिन जागे जन-विश्वास, तब बदलेगा सारा इतिहास।
पक्ष हो या फिर हो विपक्ष, देश रहे सबसे अधिक। कुर्सी से ऊपर हो ईमान, तभी बनेगा भारत महान।

*‌सीख

 *‌‌सीख : डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'

"ऐसे जियो जैसे कल ही मरना हो।
ऐसे सीखो जैसे हमेशा जीना हो।"
गाँधी जी के ये वचन, हमें अमल में लाना चाहिए। 
सीखने की उम्र नहीं होती, 
याद रखना चाहिए।
सीखना एक सतत प्रक्रिया है,
मृत्यु पर्यंत चलता है। 
नित-नित जो नए सीख लेता,
उसका व्यक्तित्व निखरता है।
एक बच्चे से भी हम कभी कुछ सीख लेते, कभी परिस्थितियाँ हमें सिखाती हैं।
सीखने से मानव की, 
याद्दाश्त बढ़ती जाती है।
"सीखना कभी मन को  थकाता नहीं है।" लिओनार्डो द विंची ने बताया।
"अज्ञानी होना इतनी शर्म की बात नहीं है, जितना सीखने की इच्छा न रखना।" बेंजामिन फ्रैंकलिन ने समझाया। 
"सीखने की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे आपसे कोई छीन नहीं सकता।" बी.बी. किंग के वचन।
अच्छी बातें सदा सीखो, लगाकर तन और मन।
प्रभु श्री राम से,
मर्यादा और धीरज सीखो,
रामानुज भरत से सीखो भ्रातृत्व प्रेम और त्याग। 
हनुमान जी ने अशोक वाटिका उजाड़ा, सोने की लंका में लगा दी आग।
प्रभु हनुमान सिखाए हमें, 
निश्छल भक्ति और पूर्ण समर्पण।
माता सीता ने हर हाल पति का साथ निभाया, हम सबके लिए बनीं उदाहरण।
रावण की कहानी सिखलाती, 
अहंकार से किसी का भला नहीं होता। 
दुर्योधन यह सीख दे गया, 
गलत कर्म का परिणाम सदा गलत ही होता।
सीखना है तो राजा हरिश्चंद्र से सीखो, सत्य का राह कभी मत छोड़ो। 
परिवार में फूट न होने दो,
प्रेम का रिश्ता सबसे जोड़ो।
सच्चा प्रेम किया मीरा जी ने, समाज के तानों का परवाह नहीं किया। 
सच्चा प्रेम निस्वार्थ होता है, 
मीरा जी ने यह सीख दिया।
सीखने से मस्तिष्क 
स्वस्थ रहता, आनंद की अनुभूति होती।
सीखने से मन सक्रिय रहता है, उदासी महसूस नहीं होती।
हर स्थिति में अडिग रहना, कर्तव्य से न विचलित होना,
पर्वत हमें सिखलाता। 
पतंग को खुद के कटने का डर रहता है, फिर भी आसमान में उड़ता जाता।
चाँद और चकोर की लोक कथा, सच्चा प्यार दर्शाती है। 
प्रेम में कोई छल न करना,
हमें सीख दे जाती है।
धरती से धीरज सीखो, और सीखो क्षमाशीलता।
नित नित जो नए हूनर सिखता, उसका व्यक्तित्व निखरता।
फूल को कोई तोड़े, उसे परवाह नहीं रहता।
भेदभाव कभी मत करना, 
यहीं सीख हमें फूल से मिलता।
कछुआ और खरगोश की कहानी 
सिखलाती, बच्चों, अहंकार कभी मत करना।
कितनी भी बाधाएं आयें, कदम सदा आगे ही रखना।
सीखने के लिए अनेकों उदाहरण है, बस हमें अच्छी बातें सीखना होगा। 
अपने भीतर की बुराइयों को त्याग, अच्छे कर्म करना होगा।

जिन्दगी


अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारी वाणी 

       जिन्दगी  : महाकवि डा अनन्तराम चौबे

जीवन और मृत्यु के बीच 
जिन्दगी इम्तिहान लेती है ।
सुख दुख भी आते जाते हैं
ग़म और खुशी भी मिलती है ।

भागती इस जिन्दगी का 
ठिकाना कहां पर होता है ।
इंसान का जीवन यों ही 
चंचल चलायमान होता है । 

जीवन और मृत्यु के बीच 
कठपुतली सा जीवन चलता ।
मोह माया के जाल में फंसकर 
जीवन सभी का चलता रहता है ।

जिन्दगी मिली है जीने को
खुशियों से हंसकर जीलो।
जीवन मिला है जीने को
सभी  से हिल मिलकर जीलो ।

खुशी और गम आते जाते हैं
पल पल में समय बदलते हैं ।
कल कब ये किसने देखा है
कल होगा उससे भी मिलते हैं ।

जन्म और मृत्यु के बीच में
जीवन सभी का चलता हैं ।
गम, खुशियां साथ में चलती 
जीवन भी साथ में चलता है ।

माता पिता भाई बहिन से
एक घर परिवार बनता है ।
जिन्दगी की राहें चलने को
इनसे मिलकर ही चलता है ।

माता पिता की शिक्षा पाकर
जीवन की राहें संभलती है ।
बच्चों की खुशियों से माता,
पिता को खुशियां मिलती है ।

हंसी खुशी से जी लो जिन्दगी
हर पल खुशियां मिलती हैं ।
तन मन को भी खुश रखना है
जिन्दगी में खुशियां मिलती हैं ।

भागती जिंदगी का ठिकाना 
जीवन मृत्यु के बीच में होता है।
हर इंसान का जीवन  देखो
भ्रमजाल में भटकता रहता है। 

इन नरिश्तो के भंवर जाल 
यहां वहां भटकता रहता है ।
घर द्वार के ऐशो आराम में
सब कुछ ही भूला रहता है ।

माता पिता की सेवा कर लो
दुखी कभी न उनको करना ।
माता पिता से जो मिला है
उसी से जिन्दगी में खुश रहना 

ज़िन्दगी के इस सफर में
दान पुण्य भी कुछ कर लो ।
समय निकाल कर  अपना
भगवान भजन भी कुछ कर लो  

न कुछ तेरा न कुछ मेरा
बस चिड़िया रेन बसेरा है ।
पिंजड़े से पंछी उड़ जायेगा
ये तो मोह माया का डेरा है ।