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सत्य - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर
कविता... सत्य
सत्य और सच्चाई की
राह पर चलना मुश्किल है ।
साहस का तो काम यही है
जो बहुत ही कठिन होता है ।
झूठ फरेब तो आज का दौर है
बस कदम कदम पर धोखे है।
सत्य का साथ कोई न देता
पल पल आते ऐसे मौके है ।
स्वार्थ की इस दुनिया में भी
कुछ अच्छे लोग भी मिलते है ।
सत्य का साथ साहस से करते
सत्य की दम पर ही वो जीते है ।
सत्य की राह जो चलता है
राह बहुत वो कठिन होती है ।
साहस से मंजिल पाना ही
सत्य की वो मिशाल होती है ।
ठोकर खाकर मंजिल पाना
गिरना उठना और संभलना ।
सत्य की राह ,यही होती है
कदम कदम पर साहस रखना ।
सुख दुख चाहे जो भी आये
हिम्मत और साहस न छोड़ना
जीवन में कदम कदम पर ही
सत्य का साथ हमेशा ही देना ।
सुख दुख जीवन में आते जाते
जो समय के साथ बदलते हैं ।
संघर्ष मयी ये जीवन होता है
सत्य का साथ कठिन होता है ।
जीवन और मृत्यु
एक अटल सत्य है
अपने समय पर होती है ।
यही तो मृत्यु का सत्य है ।
विधि का विधान
क्या है कौन जानता है ।
कब क्या हो जाए
किसको पता है ।
नियति कभी हंसाती है
तो कभी रुलाती भी है ।
नियति की गति अपने
समय पर ही चलती है ।
बस समय से ही चलती है।
इन्सानों द्वारा किये कार्य
में कोई गलती हो जाय
कही कोई हादसा हो जाय ।
उसमें मीडिया बाले और
तमाम लोग हो हल्ला करते हैं।
एक दूसरे पर अपना पल्ला
झाड़ कर दोषारोपण करते है ।
अपना मतलब सिद्ध करने
जले पर नमक छिड़कते है ।
होनी अपने समय पर होनी है
उसको कोई टाल नही सकते है।
गीता के ज्ञान को सभी जानते है
कथा भागवत में सुनते गुनते है ।
सुख दुख तो आते जाते हैं
पर दुख आने पर घबरा जाते हैं ।
रावण तो परम ज्ञानी अधर्मी था
अहंकारी पापी अहम में भूला था ।
पाप का घड़ा जब भर गया
तब अंत में मारा भी गया था ।
अपने साथ सभी पापियों को
काल के मुंह का ग्रास बनाया
विधी का विधान समय पर हुआ ।
उससे कोई नही बच पाया ।
कुछ हादसे दुर्घटनाएं विधी
द्वारा ही निर्धारित होती है।
कितना भी उपाय कर लो
सत्य बात समय पर होती है ।
महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त
जबलपुर म प्र




