Monday, 18 May 2026

परिवर्तन - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'


 परिवर्तन - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'

इस जग में कुछ भी स्थाई नहीं है, परिवर्तन होता रहता है। 
परिवर्तन जरूरी है मानव के विकास के लिए, हर व्यक्ति यह कहता है।
'परिवर्तन  संसार का नियम है' भगवान श्री कृष्ण ने भागवत गीता में बताया।
जिसने परिवर्तन को स्वीकार कर आगे बढ़ा,  वही जीवन में सफलता पाया। 
परिवर्तन अपरिहार्य है, जो उत्पन्न होता है उसका अंत भी होता है। 
मौसम बदलता है, तभी तो किसान मौसम के अनुसार बीज बोता है।
ऋतु परिवर्तन होता है, नये फूल खिलते हैं।
बीज अंकुरित होते, पौधों से हमें फल मिलते हैं।
परिस्थितियाँ बदलती हैंं, अपना नजरिया भी भी बदलना होगा।
बेहतर जिंदगी के लिए, बदलाव स्वीकार करना होगा।
याद रखिए हर परिवर्तन का अपना महत्व होता है।
मनुष्य खुद को लचीला रखता, उसका जीवन आनंदित होता है।
उम्र के साथ शरीर में बदलाव आता है।
शिशु किशोर होता,  फिर वृद्धावस्था की ओर जाता है।
परिवर्तन जिंदगी में आएगी, हमें उसके अनुसार खुद को तैयार करना होगा।
हर परिवर्तन हमारे मन के अनुसार नहीं होता, यह याद रखना होगा।
परिवर्तन जीवन की एकरसता को तोड़ता है, नया उमंग लाता है।
जो परिवर्तन स्वीकार नहीं करता, वह जिंदगी के दौड़ में पीछे रह जाता है।
दिन और रात बदलते हैं, रात में शशि नभ में दिखते,  दिन में सूर्य दिखते हैं।
पृथ्वी के अंदर कुछ परिवर्तन के कारण, ज्वालामुखी फटते हैं।
सुख के बाद दुख और दुख के बाद सुख, एक चक्र की तरह चलता है।
परिवर्तन से हम नई तकनीक पातें, कार्य क्षमता बढ़ता है।
अनुभव के अनुसार, हमारे विचार बदलते हैं। 
वातावरण के अनुसार, 
हम बदलाव स्वीकार करते हैं।
परिवर्तन स्वीकार करो बंधु,
आनंद की आंधी बहेगी। 
आंतरिक खुशी मिलेगी,
जीवन की बगिया महकेगी।

डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
स्वरचित

प्रेम एक साधना - संजय जैन "बीना"

प्रेम एक साधना - संजय जैन "बीना"

शीर्षक : *प्रेम एक साधना*
विधा : कविता

चिराग-ए दिल में जलाओगें
तो प्रेम बरसेगा।
दिल में निश्चित ही
प्यार का उदय होगा।
जो प्रेम को इबादत 
और साधना समझते है।
वो ही मोहब्बत के 
रस को पी पाते है।।

दिल-ए नादान जो होते है 
प्यार वो कर नहीं पाते।
क्योंकि प्यार करना 
इतना आसान नहीं होता।
ये तो वो तपस्या और
साधना होती है।
जो दिलों के मिलन 
से ही जन्म लेती है।।

आज कल तो मोहब्बत को
प्रेम वासना से देखते है।
जिस्म की प्यास बुझाने
के लिए मोहब्बत करते है।
पर रब ने भी ऐसा 
सबक सिखाया उनको।
और जीवन अधूरा 
बनाया उनका है।।

प्यार को प्यार से जीतोगें
तो ही प्यार पाओगें।
पूणिमा के चांद की तरह  
तुम्हारे खिल जाओगे।
और प्रेम रस को तुम 
जिंदगी भर पाओगें।
और गुलाब की तरह 
तुम महक जाओगें।
जीवन में स्नेह-प्यार को
मरते दम तक पाओगें।।

जय जिनेन्द्र 
संजय जैन "बीना" मुम्बई

चुनाव - अनन्तराम चौबे अनन्त

अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारीवाणी 
साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु 
चुनाव - अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर मध्यप्रदेश 


देश के इतने बड़े लोकतंत्र में 
अक्सर चुनाव होते रहते हैं ।
आचार संहिता लगने से ही 
 जनता के काम रूक जाते है ।

सरकारी आफिसों के अफसर
बाबूओं को बहाना मिल जाता है ।
काम भले नही करना चाहते हैं
आचार संहिता का बहाना होता है ।

चुनाव लोकतंत्र की प्रक्रिया है
नेता जनता के प्रति निधि होते हैं।
चुनाव में जीतकर,पंच सरपंच, 
  पार्षद विधायक सांसद बनते हैं।

लोकतंत्र के नाम से सबको
बोट डालने की स्वतंत्रता होती है
जो नाम की ही बस रहती है
सच जनता की मजबूरी रहती है।

चुनाव लड़ने में नेता का
कुछ माप दंड जरूरी है ।
शिक्षा, साफ सुधरी छवि
नेता की होना जरूरी है ।

सांसद या विधायक हो
जनता ही इनको चुनती है ।
चुनाव जीतने के बाद में
फिर मनमानी इनकी होती है ।

राजनैतिक पार्टियां हमेशा
अपना उल्लू सीधा करती हैं ।
सत्ता की कुर्सी पाने चुनाव में
हर हथकंडे इसमें अपनाती है ।

देश के चुनाव में सभी पार्टियां
सत्ता की कुर्सी पाने लड़ती हैं ।
सारा सच है पूरा जोर लगाकर
चुनाव प्रचार पर जोर देती हैं ।

नेता चुनाव में भले लड़ते हैं
हार जीत भी होती रहती है ।
छींटा कसी आपस में करते
नेताओं की मजबूरी होती है ।

सत्ता में जो भी पार्टी आती है
अपने हिसाब से कानून बनाते हैं ।
सारा सच है नेता बनने में इनको
शिक्षा के मापदंड क्यों नहीं होते हैं ।

अनपढ़ भी सांसद, विधायक हैं
मंत्री में शिक्षा का मापदंड नही है ।
शिक्षा से कोई अवरोध न आये
ऐसा कानून भी बनाते ही नही हैं ।

किसी प्रदेश का चुनाव हो देश में
राजनीति सब आपस में करते हैं ।
हाथ जोड़ कर बोट मांगते हैं
जाति धर्म की राजनीति करते हैं।

सांसद विधायक मंत्री बनने में
बी ए की शिक्षा होना जरूरी है ।
सारे सच की बात कहूं चुनाव में
उच्च शिक्षा का मापदंड जरूरी है ।

खानदानी राजनीति चलती है
पिता के बाद पुत्र नेता बनते है ।
कोई कोई तो पति-पत्नी पुत्र बहू
पूरा परिवार चुनाव में खड़े होते हैं।

चुनाव जो पार्टी हार जाती है
बोट चोरी का इल्ज़ाम लगाते हैं ।
कुछ पार्टियां ए टी एम मशीन में
छेड़ छाड़  का आरोप लगाते हैं ।

संसद में जो कानून बने उसमें
जनता का बहुमत होना चाहिए।
आरक्षण एस सी एस टी एक्ट 
यूजीसी कानून खत्म होना चाहिए।

महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त
    जबलपुर म प्र/

राजनीति - अमिता मराठे

राजनीति - अमिता मराठे 

राजनीति एक खेल है,
खेले जो चतुर सुजान।
पीढ़ी दर पीढ़ी समझे,
जिसने लिया इसे पहचान।

पर्वत जैसे विघ्न घिरें,
चाहे डगमग हो हालात।
राजनीति की चाल निराली,
खींचातानी दिन और रात।

कोई गाता, कोई नाचता,
दल के युवा, नर और नारी।
दूजे दल को नीचा दिखाने,
चलती रहती होड़ हमारी।

चुनावी मौसम में देखो,
भाषण कितने लुभावन होते।
मतदान होते ही लेकिन,
सबके स्वर फिर मौन होते।

राजनीति बुरी नहीं होती,
दाग़ उसे इंसाँ लगाते।
समझदार सँभलकर चलते,
नासमझ अक्सर भरमाते।

राजनीति एक खेल है,
खेले जो चतुर सुजान।
जनहित जिसका लक्ष्य बने,
वही बने सच्चा इंसान।

राजनीति बुरी नहीं होती
यदि नीयत हो ईमानदार।
जन सेवा जिसका उद्देश्य 
‌वही नेता होता स्वीकार।

राजनीति सेवा का पथ हो,
ना हो केवल स्वार्थ प्रधान।
जनता जागरूक जब होगी,
तब बनेगा देश महान।

अमिता मराठे 
इंदौर मध्य-प्रदेश 

चुनाव - गोरक्ष जाधव

चुनाव - गोरक्ष जाधव

नेताओं के झूठे वादे,
मन में उनके खूनी इरादे,
मीठे बोल,जहरीले झोल,
ध्यान वोटों पर, मिश्रि ओठों पर,
खुर्सी का लालच,
जनता की बिगड़ी हालत।

चुनाव का आना, 
वही पुराना उनका  गाना,
मुफ्त बिजली,मुफ्त शिक्षा,
मुफ्त राशन, मुफ्त पानी,
नेताओं की अजब कहानी,

आते ही चुनाव का मौसम,
खाते है माँ-बाप की कसम,
देते महंगाई, गरीबी,रोजगार की हमी,
चुनाव के बाद इन्हें खा जाती हैं जमी।

कितने सारे इनके बहाने,
खुद के  भरते है खजाने,
ये करते है बेटी बचाने के नारे,
बेटियों को कैसे छोड़े इनके सहारे?

चेलों को एक  ही दीक्षा,
मांगो वोटों की भिक्षा,
साम,दाम दंड भेद से,
ले लो  जनता की परीक्षा,

मौका परस्त ये दलबदलू,
गिरगिट की तरह रंगबदलू,
सत्ता के लिए हर करते तिकड़म,
सीधा करते ये अपना उल्लू।

फूलों के हार,मदिरा के ज्वार,
गरीबों से झूठ-मुठ का प्यार,
सत्ता में आते ही हो जाते है नौ दो ग्यारह,
जनता को बस ऊपरवाले का सहारा।

फिर वही पांच साल,
जनता के बुरे हाल,
नेता बने मालामाल,
जनता फिर से कंगाल,

पांच साल बाद फिर झूठे वादें,
फिर इनके चुनावी खूनी इरदे।

गोरक्ष जाधव©®
मंगलवेढा, महाराष्ट्र