स्वतंत्रता - डॉ. के. सुवर्णा
“स्वतंत्रता देश से नहीं मिलती, यह हमारी अपनी होती है। आइए, देश और समाज के सार्थक विकास के लिए हम सब मिलकर प्रयास करें, जिसके लिए स्वतंत्रता आवश्यक है।“
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डॉ. के. सुवर्णा
बैंगलोर
स्वतंत्रता हर मनुष्य और देश का जन्मसिद्ध अधिकार है। यह वह अमूल्य उपहार है जिसने जनता को जीवन, स्वतंत्रता और समानता का अवसर दिया है। स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ अपने विचारों को अभिव्यक्त करना है, अपने विचार, कर्म और अधिकार का सही सम्मान के साथ उपयोग करना है।
मुक्त मन ही सच्चा अधिकार है। स्वतंत्रता हर व्यक्ति को जिम्मेदारी के साथ चाहिए। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी कहा है - "पराधीन सपनेहु सुख नाहीं"। अर्थात पराधीनता में मनुष्य को सच्चा सुख नहीं मिलता।
स्वतंत्रता हर मनुष्य का अनिवार्य अधिकार है। मनुष्य को मूलभूत रूप से बातचीत करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, अपने विचारों का समर्थन रखने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। स्वतंत्रता मनुष्य को अपनी भावनाओं का आदर करने, अपनी पहचान का सम्मान करने का अधिकार देती है। स्वतंत्रता एक ऐसा अधिकार है जो मनुष्य को अपनी समस्याओं का समाधान करने में मदद करती है।
स्वतंत्रता अपने आप को अभिव्यक्त करती है, खुलकर जीने का अवसर देती है। स्वतंत्रता मनुष्य को आजाद करती है। स्वतंत्रता क्या होती है, यह एक देश के झंडे से पता चलता है। स्वतंत्रता क्या होती है, यह सूरज के उगने से पता चलता है।
यदि हम अपनी क्षमता का सही उपयोग करें तो मनुष्य सुख पाता है। आज भी जाने कितने लोग हर कदम पर युवा पीढ़ी से अपेक्षा रखते हैं कि वे स्वतंत्रता के साथ अपने मन और समाज के साथ रहकर स्वतंत्रता शब्द के वास्तविक अर्थ को समझें।
कहा गया है, "भारत देश के एक-एक नागरिक युवा पीढ़ी को सही मायने में स्वतंत्रता का समझना है। स्वतंत्रता की लगाम अपने हाथ में होनी चाहिए। युवा पीढ़ी आज ऐसा युवा वर्ग है जो अपने आइडल बनाकर चल रहे हैं। आज हमें अपने आदर्श को समझना है। स्वतंत्रता का एक उदाहरण आधुनिक काल में हमारे आधुनिकीकरण तक राजा का उदाहरण ले सकते हैं। उनकी स्वतंत्रता से समाज और तंत्र मजबूत तक फैला है। यह बस स्वतंत्रता ही प्रतिबिंब नहीं है, अपने हर कदम पर करते हुए स्वतंत्रता शब्द की सच्चाई को साकार करना ही है। स्वतंत्रता ही हर देश की पहचान है, आने वाली पीढ़ी को विरासत है।“
सारांश:
इस पैरा में लिखा है कि स्वतंत्रता का सही मतलब समझना जरूरी है। युवा पीढ़ी को अपने आदर्श चुनकर जिम्मेदारी के साथ स्वतंत्रता का उपयोग करना चाहिए। स्वतंत्रता सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि हर काम में उसकी सच्चाई को जीना है। स्वतंत्रता ही देश की पहचान है और यह आने वाली पीढ़ी की विरासत है।




