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Wednesday, 15 July 2026
चंदा चोरी - ललित कुमार शर्मा
Tuesday, 14 July 2026
सेवा : मानवता का सर्वोच्च धर्म - उजमा तरनुम
सेवा : मानवता का सर्वोच्च धर्म - उजमा तरनुमा
सेवा मानव जीवन का एक महान गुण है। यह केवल किसी की सहायता करने का कार्य नहीं, बल्कि मानवता के प्रति हमारी संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व का प्रतीक है। सेवा का भाव व्यक्ति को स्वार्थ से ऊपर उठाकर समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए प्रेरित करता है।
हमारे भारतीय संस्कारों में सेवा को सर्वोच्च धर्म माना गया है। माता-पिता की सेवा, गुरुजनों का सम्मान, रोगियों की सहायता तथा जरूरतमंदों की मदद करना सेवा के ही विभिन्न रूप हैं। सेवा के लिए धन का होना आवश्यक नहीं है। मधुर वचन, सहानुभूति, समय और श्रम का योगदान भी सेवा का महत्वपूर्ण रूप है।
आज के व्यस्त और प्रतिस्पर्धी युग में लोगों के पास एक-दूसरे के लिए समय कम होता जा रहा है। ऐसे समय में सेवा का महत्व और भी बढ़ जाता है। किसी भूखे को भोजन देना, वृद्ध व्यक्ति को सड़क पार कराने में मदद करना, रक्तदान करना, पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण करना तथा शिक्षा से वंचित बच्चों को पढ़ाना समाज सेवा के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
सेवा का लाभ केवल समाज को ही नहीं मिलता, बल्कि सेवा करने वाले व्यक्ति को भी आत्मिक संतोष और मानसिक शांति प्राप्त होती है। सेवा मनुष्य के भीतर करुणा, दया और प्रेम जैसे गुणों का विकास करती है। यही गुण एक आदर्श समाज की नींव रखते हैं।
अतः प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में सेवा के भाव को अपनाना चाहिए। यदि हम सभी अपनी क्षमता के अनुसार दूसरों की सहायता करें, तो समाज में सुख, शांति और सद्भाव का वातावरण स्थापित हो सकता है। वास्तव में, निःस्वार्थ सेवा ही मानव जीवन को सार्थक और महान बनाती है।
Uzma Taranum
Karnataka
दान - अनीता चमोली "अनू"
दान का धर्म - डॉ. वै. कस्तूरी बाई
दान की ओट - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा"
दान की ओट - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा"
चंदे की थाली लेकर जब,
कुछ चेहरे मुस्काते हैं,
सेवा के मीठे नारों से,
सपनों को बहलाते हैं।
दान समझकर जो सौंपा था,
वह विश्वास का अंश था,
पर चोरी की काली छाया में,
टूट गया हर हर्ष था।
योगदान था जनता का,
आशा की हर साँस थी,
घोटालों की आग लगी तो,
जल उठी हर आस थी।
भेंट अगर ईमान की हो,
तो मंदिर भी मुस्काता है,
पुण्य तभी फलता जग में,
जब मन निर्मल हो जाता है।
सेवा का अर्थ दिखावा नहीं,
न सत्ता का व्यापार बने,
मानवता की हर धड़कन में,
करुणा का संसार बने।
आओ ऐसा युग रचें,
जहाँ विश्वास न बिक पाए,
चंदा पहुँचे ज़रूरतमंद तक,
कोई अधिकार न लुट पाए।
दान नहीं है धन का केवल,
मन का उजला व्यवहार है,
सहयोग ही वह शक्ति है,
जिससे रोशन हर परिवार है।
डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा"
पंजाब
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