Sunday, 11 October 2026

सत्य - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त

अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारीवाणी साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु 

सत्य - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर 
कविता...   सत्य

सत्य और सच्चाई की
राह पर चलना मुश्किल है ।
साहस का तो काम यही है
जो बहुत ही कठिन होता है ।

झूठ फरेब तो आज का दौर है
बस कदम कदम पर धोखे है।
सत्य का साथ कोई न देता
पल पल आते ऐसे मौके है ।

स्वार्थ  की इस दुनिया में भी
कुछ अच्छे लोग भी मिलते है ।
सत्य का साथ साहस से करते
सत्य की दम पर ही वो जीते है ।

सत्य की राह जो चलता है
राह बहुत वो कठिन होती है ।
साहस से मंजिल पाना ही
सत्य की वो मिशाल होती है ।

ठोकर खाकर मंजिल पाना
गिरना उठना और संभलना ।
सत्य की राह ,यही होती है
कदम कदम पर साहस रखना ।

सुख दुख चाहे जो भी आये
हिम्मत और साहस न छोड़ना
जीवन में कदम कदम पर ही
सत्य का साथ हमेशा ही देना ।

सुख दुख जीवन में आते जाते
जो समय के साथ बदलते हैं ।
संघर्ष मयी ये जीवन होता है
सत्य का साथ कठिन होता है ।

जीवन और मृत्यु
एक अटल सत्य है
अपने समय पर होती है ।
यही तो मृत्यु का सत्य है ।

विधि का विधान
क्या है कौन जानता है ।
कब क्या हो जाए
किसको पता है ।

नियति कभी हंसाती है
तो कभी रुलाती भी है ।
नियति की गति अपने
समय पर ही चलती है ।

बस समय से ही चलती है।
इन्सानों द्वारा किये कार्य 
में कोई गलती हो जाय 
कही कोई हादसा हो जाय ।

उसमें मीडिया बाले और
तमाम लोग हो हल्ला करते हैं।
एक दूसरे पर अपना पल्ला
झाड़ कर दोषारोपण करते है ।

अपना मतलब सिद्ध करने
जले पर नमक छिड़कते है ।
होनी अपने समय पर होनी है 
उसको कोई टाल नही सकते है।

गीता के ज्ञान को सभी जानते है
कथा भागवत में सुनते गुनते है ।
सुख दुख तो आते जाते हैं
पर दुख आने पर घबरा जाते हैं ।

रावण तो परम ज्ञानी अधर्मी था
अहंकारी पापी अहम में भूला था ।
पाप का घड़ा जब भर गया 
तब अंत में मारा भी गया था ।

अपने साथ सभी पापियों को
काल के मुंह का ग्रास बनाया
विधी का विधान समय पर हुआ ।
उससे कोई नही बच पाया ।

कुछ हादसे दुर्घटनाएं विधी 
द्वारा ही निर्धारित होती है।
कितना भी उपाय कर लो
सत्य बात समय पर होती है ।

  महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त 
     जबलपुर म प्र 

स्वदेशी - डॉ रूपाली दिलीप चौधरी

स्वदेशी - डॉ रूपाली  दिलीप चौधरी 

स्वदेशी मेरे लिए केवल देश में बनी वस्तुओं को खरीदना नहीं है, बल्कि अपने देश और अपने लोगों के प्रति जिम्मेदारी की भावना है। जब मैं किसी स्थानीय कारीगर से बनी वस्तु खरीदती हूँ, तो मुझे लगता है कि मेरे छोटे-से निर्णय से किसी परिवार के घर का चूल्हा जल सकता है। किसी किसान, बुनकर, हस्तशिल्पी या छोटे व्यापारी की मेहनत को सम्मान मिल सकता है।

आज हम आधुनिकता और वैश्वीकरण के दौर में जी रहे हैं। बाजार में देश-विदेश की अनेक वस्तुएँ उपलब्ध हैं। ऐसे समय में स्वदेशी का अर्थ यह नहीं कि हम दुनिया से कट जाएँ, बल्कि यह है कि हम अपने देश में बनी अच्छी और गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं को प्राथमिकता दें। इससे हमारे स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

महात्मा गांधी ने स्वदेशी को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा था। उनके लिए स्वदेशी आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक था। आज भी उनका यह विचार हमें प्रेरणा देता है।

मेरा मानना है कि देशप्रेम केवल नारों में नहीं, बल्कि हमारे रोजमर्रा के छोटे-छोटे निर्णयों में दिखाई देना चाहिए। यदि हम अपनी जरूरतों में स्वदेशी को स्थान दें और अपने देश के श्रम, प्रतिभा और संसाधनों पर विश्वास करें, तो यही हमारी सच्ची देशभक्ति होगी। स्वदेशी अपनाना अर्थात अपने देश की मिट्टी, मेहनत और मनुष्य पर विश्वास करना।

  डॉ रूपाली  दिलीप चौधरी 
   Maharashtra 

वापू गाँधी और शास्त्री - वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ

वापू गाँधी और शास्त्री - वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ
                     *****
 हैं ये देश के  दो सच्चे सपूत 
 इनके कर्म कभी नहीं भूलेंगे 
                 जब तक रहेगी धरती माता
                 याद  हमें  हर  वर्ष  आयेंगे

 बापू गांधी का है नाम उजागर
 शास्त्री देश के प्रधानमंत्री बने 
        बापू  का  जन्म 2 अक्टूबर 1869
        शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904

अमर हो गए गांधीजी और शास्त्री जी
इनकी त्याग और  तपस्या अमूल्य थी
     बापू, शास्त्री की पत्नी थी बहुत महान
  कस्तूरबा व ललिता देवी जानी जाती थी

 महात्मा गांधी  विश्व में पूजे जाते हैं 
 देश दुनिया में महान समझे जाते हैं 
           2 अक्टूबर को याद किये जाते हैं
          यही हमें समझ में आते -  जाते हैं

 यही है हमारी देश की बड़ी ताकत
 जिसके चलते भारत हुआ बलवान
                  भारत अब विश्व गुरु बनेगा 
                  देश का होगा अब कल्याण 

 कहते हैं " वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ "
 बहुत  कष्ट  झेले थे शास्त्री जी ने
          अब  घबराने  की  जरूरत है नहीं
          रहस्य समझा दिया था गाँधीजी ने
              —--  धन्यवाद  —--

 रचयिता - वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ
       कोशी शिविर बथनाहा अररिया
            बिहार 

महात्मा,भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का संत महान -- नन्दलाल मणि त्रिपाठी

महात्मा,भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का संत महान -- नन्दलाल मणि त्रिपाठी

भारत के राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी के विचारों व्यवहारो पर क्या नई पीढ़ी को पुनर्विचार करने को उद्धत है स्वतंत्रता के बाद धार्मिक उन्माद में भारत कि हानि एवं नव
राष्ट्र पाकिस्तान का निर्माण कश्मीर को विशेष दर्जा दिया जाना आदि सभी प्रश्नों के उत्तर में नई पीढ़ी महात्मा कि उच्च प्रतिष्ठा एवं उनका विरोध न कर सकने कि तत्कालीन राज नेताओं कि कमजोरी को देते है!
तो क्या बापू गाँधी महात्मा को भारत द्वारा राष्ट्र पिता का गौरव सम्मान देकर कोई भूल किया है जहाँ तक मैंने स्वतंत्रता आंदोलन से सभी साक्ष्यओ का गंभीरता पूर्वक अध्ययन किया है और निष्कर्ष यही निकलता है कि महात्मा गाँधी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नेतृत्व प्रधान किया दक्षिण अफ्रीका में अप्रवासी भारतीयों कि आजादी कि लड़ाई में विजयी महात्मा आत्म विश्वास से परिपूर्ण भारत लौटने के बाद
आपस में लड़ते भीड़ते छोटी छोटी रियासतों में बंटे भारत के मौलिक समाज को दर किनार कर जन साधरण जो उपेक्षित
कमजोर एवं प्रतंत्रता कि पराकाष्ठा का शिकार था उनसे स्वतंत्रता को अधिकार के रूप में जागृत किया और छुआ छुत ऊंच नीच में भेद भाव के अंतर को समाप्त कर उन्हें संगठित किया उनमे आत्म विश्वास जगाया एवं नेतृत्व प्रदान किया जिसका मध्यम सत्य अहिंसा एवं सत्याग्रह
बनाया जिसके माध्यम से ब्रिटिश हुकूमत के आर्थिक तत्र पर प्रहार
विदेशी वस्त्रो कि होली नमक सत्याग्रह के नील खेती आदि जन जागरण किया जिससे ब्रिटिश हुकूमत के भरतीय अर्थ तंत्र कि जड़े उखाड़ने लगी साथ ही साथ आम भरतियों का उनके नेतृव में संघठित होना ब्रिटिश हुकूमत कि चूले हिला गया निर्विवाद रूप से महात्मा भारत कि स्वतंत्रता कि लड़ाई के महा नायक थे उनके द्वारा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में किए गए योग दान ही भारत कि स्वतंत्रता का सार्थक सार है!
अतः महात्मा को राष्ट्र पिता का सम्मान देकर आम भरतियों द्वारा
बापू के प्रति कृतज्ञता है निः संदेह
मोहन दास कर्म चंद्र गाँधी आम इंसान से अलग ईश्वर अंश आत्मा के महात्मा के रूप में वर्तमान एवं भविष्य में भारतीयों का प्रथ प्रकाश प्रदान करते हुए आने वाली हर पीढ़ी को दिशा दृष्टि कोण प्रदान करते रहेंगे!!

नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश!! 

Saturday, 10 October 2026

गाँधी - भारती सरदाना

गाँधी - भारती सरदाना

सत्य अहिंसा की लाठी लिए हाथों में
वह निकल पड़ा देश को आजादी दिलाने।
शांति का वह दूत प्रेम का था वह समर्थक, 
नफरत को मिटाकर दिलों में प्यार जगाने।

एक हाथ में चरखा था एक हाथ में लाठी, 
नारा था स्वदेशी का थी जान यह माटी।
भाईचारा एकता की चाह ले मन में, 
भर दिया स्वावलंबन हर एक जन में।
जात-पात धर्म की दीवार गिराने, 
वह निकल पड़ा देश को आजादी दिलाने।

​असहयोग आंदोलन आमरण अनशन, 
आजादी दिलाने को किया कितने जतन।
अंग्रेजों भारत छोड़ो वह हक से कह गया, 
त्याग कर आराम कितने ज़ुल्म सह गया।
दांडी यात्रा कर आत्मनिर्भर बनाने, 
वह निकल पड़ा देश को आजादी दिलाने।

​राष्ट्रपिता की पदवी बापू ने पाई, 
बदले में इस देश को नई राह दिखाई।
मां-बाप के संस्कार शिरोधार्य करके, 
बिन शस्त्र उठाए ही आजादी दिलाई।
प्रेम और स्नेह से भारत को सजाने, 
वह निकल पड़ा देश को आजादी दिलाने।


नाम - भारती सरदाना /Bharti Sardana 
पता - गुरुग्राम, हरियाणा / Gurugram, Haryana