पारदर्शिता - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
पारदर्शिता का शाब्दिक अर्थ, स्पष्टता, आर-पार दिखाई देना।
हर पहलू सबके सामने होना, कुछ भी छिपा नहीं होना।
ऋग्वेद का अंतिम सूक्त, जिसे संगठन सूक्त भी कहते हैं।
"संगच्छध्वं, संवदध्वम,सं वो मनांसि जानताम्।"
हम एक साथ चलें, एक साथ बोलें, हमारा मन एक दूसरे को समझे, यही कहते हैं।
"यस्तिष्ठति चरति यश्च
वञ्चति यो निलायं चरति य: प्रतङ्कम्। द्वौ संनिषद्य यन्मन्त्रयेते
राजा तद्वेद वरुणस्तृतीय:।।"
अथर्ववेद 4.16.2
में है वर्णित।
कोई दूसरे को ठगे, जब दो व्यक्ति मिलकर गुप्त मंत्रणा करें, वहाँ राजा वरुण रहते उपस्थित।
हमारे द्वारा किए गए सारे काम, भगवान से छिपे नहीं रहते।
हमारे बड़े यही कहते।
भगवान, ब्रम्हांड के कण-कण में हैं व्याप्त।
हमारे हर कर्म की खबर, होती उनको
प्राप्त।
ऐसा काम क्यों करना, जो किसी
से पड़े छुपाना।
अपना दामन साफ रखना, औरों के काम सदा आना।
यह जीवन एक चुनौती है,
सुख-दुख दोनों ही है मिलता।
दुराव-छिपाव क्यों करना, अपने कर्म का फल ही तो मानव को मिलता।
हर सूचना सबको मिले, हर काम में पारदर्शिता है जरूरी।
नियम स्पष्ट हो, सब मिलकर काम करें, आपस में न रहे दूरी।
आज सीसी टीवी से हम डरते हैं, सीसी टीवी के सामने, हम गलत हरकत नहीं करते।
चौबीस घंटा ईश्वर की निगाह हम पर है,
इसकी परवाह नहीं करते।
यह सीसीटीवी कभी- कभी हम जानबूझ कर खराब करते, कभी ये किसी कारण से स्वयं खराब
होते।
प्रभु की सीसीटीवी लगातार काम करती, वहाँ कोई व्यवधान नहीं होते।
पारदर्शिता रिश्तों में हो, रिश्ते होते मजबूत।
छिपाना हमें तभी पड़ता, जब होती हमारी गलत करतूत।
नेहरू जी ने पत्र लिखा था इंदिरा गांधी जी को, "वे जो भी काम करें, सबके सामने रोशनी में करें।"
सही काम हम करें, सही उद्देश्य से करें, फिर क्यों हम डरें?
पारदर्शिता यदि हमारे काम में हो, सब करेंगे हम पर विश्वास।
गलतफहमियां नहीं होंगी, समाज का होगा विकास।
भ्रष्टाचार घटेगा,
हम सब उन्नति करेंगे।
अपनों के संग हम, सफलता की सीढ़ी चढ़ेंगे।
हमें भी बच्चों को समझना होगा, ऐसा काम न करो, जो पड़े सबसे छुपाना।
तुम्हारे हर काम में पारदर्शिता हो, ऐसा काम तुम करो, देखे तुम्हें सारा जमाना।
डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
स्वरचित
West Bangal




