जिम्मेदारी - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
हर व्यक्ति को निभानी पड़ती है, अपनी जिम्मेदारी।
पिता का हाथ सर से हटते ही, बच्चे पर आ जाता है जिम्मेदारी का बोझ भारी।
जिम्मेदारी निभानी है, गिले शिकवा क्या करना।
अपनी जिम्मेदारी निभाना, सदा खुश रहना।
जिम्मेदारी आते ही, बच्चे वक्त से पहले बड़े हो जाते हैं।
कुछ लोग तो कम उम्र से ही, खुद को जिम्मेदारियों के बीच पाते हैं।
जिम्मेदारी सच्चे दिल से निभाना, जिम्मेदारियों से नहीं डरना।
जिम्मेदार व्यक्ति को ही जिम्मेदारियाँ दी जाती हैं, बस यही याद रखना।
जिम्मेदारी निभाते- निभाते कंधे थक जाते हैं।
कमर झुक जाता है, सर के बाल सफेद हो जाते हैं।
जीवन भर मनुष्य अपनी जिम्मेदारी निभाता है।
फिर भी सब को खुश नहीं रख पाता हैं।
हर आदमी की अपनी जिम्मेदारी होती है।
जिम्मेदारी अगर बड़ी हो, चैन से सोने नहीं देती है।
डॉक्टर जी जान से, अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।
कभी-कभी ये खाना भी नहीं खाते हैं।
हमारे सैनिक सीमा पर, अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
अपनी जान जोखिम में डाल, दुश्मन से हमें बचा रहे हैं।
गुरु अपना फर्ज निभाते, शिष्य को ज्ञान देते हैं।
उसके जीवन में उजाला भरतें, अंधकार हर लेते हैं।
सबसे बड़ी जिम्मेदारी तो प्रकृति निभाती है।
नदिया खुद पानी पीती नहीं, औरों को पिलाती हैं।
पेड़ हमें फल देते, छाया भी देते हैं।
आज भी कई लोग, मुर्गे की बांग से उठते हैं।
जिम्मेदारी निभाना, कभी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ना।
जिम्मेदार व्यक्ति
ही सफल होता है, याद रखना।
मानव, तुम भी अपनी जिम्मेदारी निभाओ।
पर्यावरण को बचाओ, पेड़ अधिक से अधिक लगाओ।
माता-पिता की सेवा करो, वृद्धाश्रम बंद करवाओ।
प्लास्टिक का उपयोग बंद करो, गंगा मां को प्रदूषित होने से बचाओ।
ईमानदारी से, निष्ठा से, काम करो, नैतिकता को मत छोड़ो।
प्रेम, करुणा, दया का भाव मन में रखो, इर्ष्या, लोभ छोड़ो।
किसी को शारीरिक या मानसिक कष्ट मत पहुंचाओ।
देश के कानून का सम्मान करो,
समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाओ।
सदा सही काम करो, परिश्रम से नहीं डरो।
उदास मत रहो, जो मिला है उसके लिए ईश्वर का आभार व्यक्त करो।
डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
स्वरचित
West Bangal




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