लोकतंत्र की पुकार - डॉ . प्रो . वै . कस्तूरी बाई
सरकार का धर्म यही—जनहित की राह सजाए,
संविधान की मर्यादा रखे, न्याय-दीप जलाए।
ग़ैर क़ानूनी कृत्यों से शासन को दूर रखे,
अवैधता के अंधकार में सत्य का नूर रखे।
लोकतांत्रिक मूल्यों पर नाजायज़ वार न हो,
जन-अधिकारों का कभी अनधिकृत संहार न हो।
क़ानून-विरुद्ध कदम से व्यवस्था न डगमगाए,
अवैधानिक आदेश न्याय की नींव न हिलाए।
प्रतिबंधित कर्मों को संरक्षण यदि मिल जाए,
तो अपराधी निर्भय होकर सीमा लाँघता जाए।
अपराधिक प्रवृत्ति को सत्ता का साथ न मिले,
निर्दोष जन को न्याय पाने में आघात न मिले।
अवैधता चाहे जितने मुखौटे पहनकर आए,
सत्य की एक किरण हर छल का पर्दा उठाए।
सरकार वही जो जनता का विश्वास निभाए,
सत्ता को सेवा समझे, अहंकार न दिखाए।
क़ानून सभी पर समान हो—यही लोकतंत्र की शान,
न्याय जहाँ निर्भीक रहे, वहीं महान हिंदुस्तान।
अनधिकृत हस्तक्षेप की हर दीवार गिरानी है,
नाजायज़ सत्ता की हर सीमा पहचाननी है।
अवैधानिकता मिटे, संविधान का मान बढ़े,
न्याय का दीप जले और भारत आगे बढ़े।
जनता की आवाज़ रहे सत्ता का सच्चा प्रमाण,
न्याय, स्वतंत्रता, समता से हो राष्ट्र महान।
डॉ . प्रो . वै . कस्तूरी बाई
बेंगलूरु
कर्नाटक
.jpg)




